Home » उत्तर प्रदेश » गाजियाबाद में थूक लगाकर रोटी बनाने का वीडियो वायरल ‘चिकन प्वाइंट’ रेस्टोरेंट में कारीगर की शर्मनाक हरकत, आरोपी गिरफ्तार

गाजियाबाद में थूक लगाकर रोटी बनाने का वीडियो वायरल ‘चिकन प्वाइंट’ रेस्टोरेंट में कारीगर की शर्मनाक हरकत, आरोपी गिरफ्तार

Ghaziabad News: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से खाद्य सुरक्षा और सामाजिक भरोसे को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक रेस्टोरेंट में रोटी बनाते समय कारीगर द्वारा उस पर थूकने का वीडियो सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। मामला मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र के दुहाई इलाके में स्थित ‘चिकन प्वाइंट’ रेस्टोरेंट का है, जहां रोजाना सैकड़ों लोग खाना खाते हैं।

खाना बनाते वक्त थूकता दिखा कारीगर

शुक्रवार शाम हर्ष चौधरी नाम का युवक अपने दोस्तों के साथ रेस्टोरेंट में खाना खाने पहुंचा था। उसी दौरान उसकी नजर तंदूर के पास खड़े कारीगर पर पड़ी, जो रोटी बेलने के बाद उस पर थूकता है और फिर तंदूर में डाल देता है। यह देख हर्ष ने तुरंत वीडियो बना लिया। वीडियो सामने आते ही रेस्टोरेंट में मौजूद अन्य ग्राहकों ने खाना खाने से इनकार कर दिया और विरोध शुरू हो गया।

Ghaziabad News: 1 मिनट 21 सेकेंड का वीडियो बना सबूत

वायरल वीडियो में साफ दिखाई देता है कि कारीगर जावेद रोटी पर थूककर उसे सेंक रहा है। वीडियो के दौरान पीछे से आवाजें आती हैं- “देखो, रोटी पर थूक रहा है, वीडियो बना लो।” जावेद के साथ मौजूद एक अन्य कर्मचारी ग्राहकों के लिए रोटियां ले जाता नजर आता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वही रोटियां परोसी जा रही थीं।

पांच साल से होटल में काम कर रहा था जावेद

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। वीडियो के आधार पर पुलिस ने आरोपी कारीगर जावेद पुत्र चांद मोहम्मद को हिरासत में ले लिया। एसीपी कविनगर सूर्यबली मौर्य ने बताया कि आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। होटल में कुल 8 कर्मचारी काम करते हैं और रोजाना करीब 500 ग्राहक यहां भोजन करते हैं।

Ghaziabad News: आखिर ऐसी हरकतों से मिलता क्या है?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस तरह की घिनौनी हरकतें बार-बार सामने क्यों आ रही हैं? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या जानबूझकर किया गया कृत्य? क्या किसी की निजी सोच, मानसिक विकृति या नफरत का शिकार आम ग्राहक बन रहा है? और सबसे अहम सवाल ऐसा करने वाले को आखिर क्या “संतोष” या “फायदा” मिलता है?

यह केवल कानून का मामला नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक विश्वास और मानवीय संवेदनाओं पर सीधा हमला है। खाने-पीने की चीजों से जुड़ा ऐसा कृत्य न सिर्फ अपराध है, बल्कि समाज में डर और अविश्वास फैलाने वाला भी है।

खाद्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल

यह घटना प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है। जब रोजाना सैकड़ों लोग वहां खाना खाते थे, तो क्या पहले कभी जांच नहीं हुई? क्या ऐसे मामलों के बाद ही कार्रवाई होगी?

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