National Electricity Policy 2026: सरकार ने बिजली क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से ‘ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी (एनईपी) 2026’ को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी कर दिया है। इसका उद्देश्य देश को आर्थिक रूप से मजबूत, पर्यावरण के अनुकूल और भरोसेमंद बिजली व्यवस्था प्रदान करना है। सरकार ने कहा कि इस मसौदे पर सभी हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं।
विकसित भारत 2047 लक्ष्य
यह ड्राफ्ट नीति ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसके तहत सरकार का लक्ष्य 2030 तक प्रति व्यक्ति बिजली खपत को 2,000 यूनिट (किलोवाट-घंटे) और 2047 तक 4,000 यूनिट से ज्यादा करना है।
ड्राफ्ट एनईपी 2026 भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप भी है, जिसमें कहा गया है कि 2030 तक कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता को 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत कम किया जाएगा और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। इसके लिए स्वच्छ और कम कार्बन वाली ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना जरूरी बताया गया है।

National Electricity Policy 2026: पुरानी नीति का अपडेट
विद्युत मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि एक बार अंतिम रूप दिए जाने के बाद यह नई नीति 2005 में बनी मौजूदा एनईपी की जगह लेगी। ‘ड्राफ्ट नीति 2026’ के मुताबिक, बिजली की जरूरतों को समय पर पूरा करने के लिए डिस्कॉम और एसएलडीसी राज्य स्तर पर रिसोर्स एडिक्वेसी (आरए) प्लान तैयार करेंगे। वहीं, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) पूरे देश के लिए एक राष्ट्रीय योजना बनाएगा।
राज्य स्तर पर योजना
नीति में यह भी कहा गया है कि बिजली दरों यानी टैरिफ को एक उपयुक्त इंडेक्स से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि हर साल अपने आप उसमें संशोधन हो सके, और यह तब लागू होगा जब राज्य आयोग द्वारा कोई शुल्क आदेश पारित नहीं किया जाता है। इसके अलावा सुझाव दिया गया है कि फिक्स्ड लागत की भरपाई धीरे-धीरे डिमांड चार्ज के जरिए की जाए, ताकि अलग-अलग उपभोक्ताओं के बीच सब्सिडी का बोझ कम हो सके।
ड्राफ्ट एनईपी 2026 में कहा गया है कि मैन्युफैक्चरिंग उद्योग, रेलवे और मेट्रो रेलवे को क्रॉस-सब्सिडी और अतिरिक्त शुल्क से छूट देने से भारतीय उत्पाद ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे और लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी।
सब्सिडी बोझ कम करना
नीति में यह भी सुझाव दिया गया है कि जिन उपभोक्ताओं का बिजली लोड 1 मेगावाट या उससे ज्यादा है, उनके लिए कुछ मामलों में यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन से छूट दी जा सकती है। ड्राफ्ट नीति में विवाद निपटान व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि विवाद जल्दी सुलझें और उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ कम हो।

नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) को बढ़ावा देने के लिए बाजार आधारित तरीकों और कैप्टिव पावर प्लांट्स के जरिए नई क्षमता जोड़ने का सुझाव दिया गया है। छोटे उपभोक्ताओं के लिए स्टोरेज की सुविधा डिस्कॉम के जरिए देने की बात कही गई है, जिससे लागत कम होगी।
National Electricity Policy 2026: विवाद समाधान मजबूत
नीति में यह भी कहा गया है कि उपभोक्ता डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी (डीआरई) से बची हुई बिजली का व्यापार कर सकेंगे और 2030 तक रिन्यूएबल और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों को बराबरी का दर्जा दिया जाएगा।
शांति अधिनियम 2025 के प्रावधानों के अनुसार, इसमें एडवांस न्यूक्लियर तकनीक, मॉड्यूलर रिएक्टर, छोटे परमाणु रिएक्टर और उद्योगों द्वारा परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करने की भी सिफारिश की गई है।
सस्ती और भरोसेमंद बिजली
गौरतलब है कि पहली राष्ट्रीय विद्युत नीति फरवरी 2005 में लागू की गई थी, जिसका उद्देश्य बिजली की कमी, सीमित पहुंच और कमजोर ढांचे जैसी समस्याओं को दूर करना था। इसके बाद से भारत के विद्युत क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। सरकार का कहना है कि ड्राफ्ट एनईपी 2026 एक ऐसा पूरा खाका है, जिससे देश के लोगों को सस्ती, भरोसेमंद और अच्छी गुणवत्ता की बिजली मिल सकेगी।
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