Vayu Mudra Benefits: आज के समय में लोग मोबाइल और लैपटॉप पर घंटों बैठे रहते हैं। ऊपर से गलत खानपान और तेज़ रफ्तार जिंदगी ने शरीर को अंदर से थका दिया है। कई बार पेट में गैस, कब्ज, बेचैनी, घबराहट, जोड़ों में दर्द या नींद न आना जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। अक्सर लोग इन्हें छोटी बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि ये संकेत होते हैं कि शरीर का अंदरूनी संतुलन बिगड़ चुका है।
शरीर में बिगड़ा संतुलन
आयुर्वेद मानता है कि जब शरीर के अंदर ऊर्जा सही तरीके से बहना बंद कर देती है, तभी बीमारियां पैदा होती हैं। इस ऊर्जा को संतुलित करने का एक आसान और प्राकृतिक तरीका है हस्त मुद्राएं। उंगलियों के जरिए हमारा सीधा संबंध दिमाग और तंत्रिका तंत्र से होता है, इसलिए इनका असर शरीर पर गहराई तक पड़ता है।

आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर पांच तत्वों से बना है: आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी। जब इनमें से कोई भी तत्व असंतुलित होता है, तो उसका असर सीधे हमारी सेहत पर दिखाई देता है। इन सभी में वायु तत्व सबसे ज्यादा चंचल माना जाता है। अगर शरीर में वायु बिगड़ जाए, तो गैस, अपच, कब्ज, बेचैनी, जोड़ों का दर्द, दिल की धड़कन तेज होना और घबराहट जैसी परेशानियां होने लगती हैं।
Vayu Mudra Benefits: वायु तत्व और पाचन शक्ति
इसी वायु तत्व को शांत करने के लिए योग में एक खास मुद्रा बताई गई है, जिसे वायु मुद्रा कहा जाता है। देखने में यह मुद्रा बहुत साधारण लगती है, लेकिन इसका असर शरीर के भीतर गहराई तक होता है। आयुर्वेद के अनुसार अंगूठा अग्नि तत्व का प्रतीक है और तर्जनी उंगली वायु तत्व को दर्शाती है। जब तर्जनी उंगली को मोड़कर अंगूठे के नीचे दबाया जाता है, तो अग्नि तत्व वायु को नियंत्रित करने लगता है।

वायु मुद्रा करने का तरीका
वायु मुद्रा करने का तरीका बेहद आसान है। किसी शांत जगह पर आराम से बैठ जाएं। रीढ़ की हड्डी सीधी रखें और आंखें बंद कर लें। अब तर्जनी उंगली को मोड़कर अंगूठे के आधार पर हल्के से दबाएं और बाकी तीनों उंगलियां सीधी रखें। सांस सामान्य रखें। इस मुद्रा में बैठते ही शरीर धीरे-धीरे रिलैक्स होने लगता है। रोज़ 15 से 20 मिनट तक इसका अभ्यास करने से अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं।
सुबह खाली पेट शांत मन से की गई वायु मुद्रा ज्यादा असरदार मानी जाती है। हालांकि जरूरत पड़ने पर इसे कुर्सी पर बैठकर या चलते-फिरते भी किया जा सकता है।

जोड़ों और मांसपेशियों में लाभ
वायु मुद्रा का सबसे पहला असर तंत्रिका तंत्र पर दिखाई देता है। यह नसों को शांत करती है, जिससे बेचैनी, घबराहट और तनाव धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। जब दिमाग शांत होता है, तो शरीर के बाकी अंग भी बेहतर तरीके से काम करने लगते हैं। इसका सीधा फायदा पाचन तंत्र को मिलता है।
अक्सर गैस, सूजन और अपच की समस्या इसलिए होती है क्योंकि पेट और आंतों में वायु फंस जाती है। वायु मुद्रा इस रुकी हुई वायु को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे पेट हल्का महसूस होता है।
इसके अलावा यह मुद्रा रक्त संचार को भी बेहतर बनाती है। जब शरीर में ब्लड फ्लो सही होता है, तो जोड़ों और मांसपेशियों तक सही पोषण पहुंचता है। इसी कारण जोड़ों के दर्द, साइटिका और मांसपेशियों की जकड़न में भी वायु मुद्रा को लाभकारी माना जाता है।







