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ऑनलाइन गेमिंग का खतरनाक सच: गाजियाबाद की घटना से क्या सीखें माता-पिता?

ऑनलाइन गेमिंग का खतरनाक सच: गाजियाबाद की घटना से क्या सीखें माता-पिता?

Ghaziabad News: गाजियाबाद से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने एक बार फिर बच्चों में बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग की लत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, तीन नाबालिग बहनों की मौत के पीछे एक टास्क-आधारित ऑनलाइन गेम की लत को वजह माना जा रहा है। यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि हर उस पैरेंट के लिए चेतावनी है जिनके बच्चे स्मार्टफोन या टैबलेट पर समय बिताते हैं।बताया जा रहा है कि ये लड़कियां एक ऐसे गेम से जुड़ी हुई थीं, जो कोरियन पॉप कल्चर और वर्चुअल रिश्तों पर आधारित था। इस तरह के गेम्स में खिलाड़ी को एक काल्पनिक किरदार से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया जाता है, जिससे बच्चा धीरे-धीरे असल दुनिया से कटने लगता है।

Ghaziabad News: कैसे काम करते हैं ऐसे टास्क-बेस्ड गेम?

टास्क-बेस्ड गेम साधारण मनोरंजन तक सीमित नहीं होते। इन गेम्स में खिलाड़ियों को हर दिन नए टास्क और चुनौतियां दी जाती हैं, जिससे वे लगातार गेम से जुड़े रहें। गेम इस तरह डिज़ाइन किए जाते हैं कि खिलाड़ी वर्चुअल कैरेक्टर से भावनात्मक रूप से जुड़ने लगता है और उसे यह महसूस कराया जाता है कि उसका किसी से “सीक्रेट” या “खास रिश्ता” है। यही भावनात्मक जुड़ाव धीरे-धीरे बच्चों को असल दुनिया से दूर करने लगता है। कई मामलों में इन गेम्स के अनऑफिशियल वर्जन या उनसे जुड़े ऑनलाइन ग्रुप्स बच्चों को खतरनाक चुनौतियां देने लगते हैं, जिनका असर उनके मानसिक संतुलन और व्यवहार पर गहराई से पड़ सकता है।

Ghaziabad News: पैरेंट्स किन बातों पर तुरंत ध्यान दें?

अगर आपका बच्चा मोबाइल गेम खेलता है तो कुछ बातें नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए। सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि गेम में चैट फीचर है या नहीं और क्या बच्चा अजनबियों से संपर्क कर सकता है। इसके अलावा गेम की उम्र रेटिंग देखें कि यह बच्चे की उम्र के हिसाब से सुरक्षित है या नहीं। ध्यान दें कि बच्चे का व्यवहार बदल तो नहीं रहा, जैसे कि चिड़चिड़ापन, अकेले रहना या देर रात तक जागना। गेम इंस्टॉल करते समय ऐप की परमिशन भी जांचें, जैसे कैमरा, माइक या लोकेशन जैसी गैर-जरूरी एक्सेस। साथ ही यह देखें कि गेम में बार-बार इन-ऐप खरीदारी की मांग तो नहीं हो रही है। बच्चों से बातचीत करना भी बेहद जरूरी है। सिर्फ फोन चेक करना पर्याप्त नहीं है, उन्हें खुलकर बताने दें कि वे कौन-सा गेम खेल रहे हैं और क्यों, गेम में कैसा महसूस करते हैं और अगर कोई उन्हें डराता या दबाव डालता है तो उन्हें कैसे लगता है। डांटने की बजाय समझाना और साथ में गाइड करना हमेशा ज्यादा असरदार होता है।

एक छोटी सी लापरवाही, बड़ा खतरा

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हर गेम खतरनाक नहीं होता, लेकिन बिना निगरानी के गेमिंग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। समय रहते सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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