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1 बड़ी पार्टी छोड़कर खोबायेब अमीन JUP में शामिल, राजनीति में नई चर्चा

खोबायेब अमीन ने कांग्रेस छोड़ जनता उन्नयन पार्टी में शामिल होकर जनता और अल्पसंख्यक समाज के मुद्दों पर सक्रिय राजनीति करने का संकल्प लिया।
कांग्रेस में निराशा ने दी झटका

Congress-JUP Shift: बसिरहाट के मावलानाबाग दरबार शरीफ के पीरजादा खोबायेब अमीन ने कांग्रेस छोड़कर जनता उन्नयन पार्टी (JUP) में शामिल होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस पर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि कांग्रेस में रहते हुए वे राज्य एक्जीक्यूटिव सेक्रेटरी थे, लेकिन धीरे-धीरे राजनीतिक परिस्थितियों से निराश हो गए। उनका कहना था कि वे तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ सक्रिय रूप से लड़ना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने ममता बनर्जी या तृणमूल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने से मना कर दिया।

केंद्रीय नेतृत्व की चुप्पी से भ्रम

खोबायेब अमीन का आरोप है कि कांग्रेस का अस्थिर और दोहरा रुख उन्हें पार्टी छोड़ने पर मजबूर कर गया। उन्होंने कहा, “अगर कोई पार्टी खुद को विपक्ष कहती है लेकिन मैदान में सक्रिय नहीं होती, तो उसका काम और अर्थ क्या बचता है। जनता को स्पष्ट राजनीतिक रुख चाहिए, समझौते की राजनीति नहीं।”

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में संगठन मजबूत करने के बजाय केंद्रीय नेतृत्व चुप रहता रहा, जिससे कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भ्रम पैदा हुआ।

Congress-JUP Shift: कांग्रेस में निराशा ने दी झटका
कांग्रेस में निराशा ने दी झटका

Congress-JUP Shift: जनता उन्नयन पार्टी में नई जिम्मेदारी

मुरशिदाबाद के मोरादीघी में हुमायूं कबीर के हाथों उन्होंने जनता उन्नयन पार्टी की सदस्यता ली और उन्हें JUP का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। खोबायेब अमीन ने कहा कि किसी पद के लालच में उन्होंने पार्टी नहीं बदली, बल्कि नई जिम्मेदारी उन्हें जनता के मुद्दों को उठाने और संघर्ष करने का अवसर देती है।

उन्होंने बताया कि कांग्रेस में रहते हुए कई बार राज्य के मुद्दों पर मुखर होने की कोशिश की, लेकिन ऊपर से निर्देश के कारण संयम बरतने को कहा गया। उनके शब्दों में, “अगर विपक्ष विरोध नहीं करेगा, तो लोकतंत्र में उसकी भूमिका क्या रह जाती है?”

आम जनता और अल्पसंख्यक मुद्दों पर फोकस

खोबायेब अमीन ने स्पष्ट किया कि JUP में वे आम जनता की समस्याओं, अल्पसंख्यक समाज की शिक्षा और रोजगार, बेरोजगारी और महंगाई के खिलाफ लगातार आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा, “राजनीति लोगों के साथ खड़ी होनी चाहिए, समझौता करने नहीं।”

उनके इस दल-बदल और कांग्रेस पर खुले आरोपों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा पैदा कर दी है। खासकर बसिरहाट और मुर्शिदाबाद में इसका राजनीतिक प्रभाव अब चर्चा का विषय बन गया है।

Report By: Pijush

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