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UP Board Exam: योगी सरकार की बड़ी पहल: अब जेल में बंद कैदी भी देंगे हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा

UP Board Exam: योगी सरकार की बड़ी पहल: अब जेल में बंद कैदी भी देंगे हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा

UP Board Exam: उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षाएं 18 फरवरी से शुरू हो रही हैं और राज्यभर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसी बीच मुरादाबाद जिला कारागार से एक सकारात्मक खबर सामने आई है। यहां सजा काट रहे कुछ बंदी इस बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में शामिल होंगे। जेल प्रशासन ने पढ़ाई के इच्छुक कैदियों के लिए विशेष इंतजाम कर शिक्षा की नई राह खोलने की कोशिश की है।

शिक्षा से सुधार की कोशिश

जेल प्रशासन का मानना है कि शिक्षा बंदियों के जीवन में बदलाव ला सकती है। इसी सोच के साथ मुरादाबाद जेल में पढ़ाई की व्यवस्था मजबूत की गई है। इस साल कुल 5 कैदी यूपी बोर्ड की परीक्षा देंगे इनमें से 1 हाईस्कूल और 4 इंटरमीडिएट के परीक्षार्थी हैं। इन बंदियों को परीक्षा की तैयारी के लिए जरूरी किताबें, पढ़ने का समय और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया है।

UP Board Exam: ईच वन, टीच वन से मिल रही मदद

जेल में पढ़े-लिखे बंदियों को अन्य निरक्षर या कम पढ़े कैदियों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाता है। ‘ईच वन, टीच वन’ पहल के तहत कैदी ही कैदियों के शिक्षक बन रहे हैं। इसके अलावा शिक्षा विभाग की मदद से पुरुष और महिला शिक्षक भी समय-समय पर जेल में आकर पढ़ाई में सहयोग करते हैं।

UP Board Exam: कंप्यूटर और स्किल ट्रेनिंग पर भी जोर

सिर्फ किताबों तक ही शिक्षा सीमित नहीं है। जेल में कंप्यूटर प्रशिक्षण के चार बैच चल रहे हैं, जिनमें बंदियों को बेसिक डिजिटल स्किल्स सिखाई जा रही हैं। इसके साथ ही मोटर वाइंडिंग और अन्य व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, ताकि सजा पूरी होने के बाद बंदी आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में नई शुरुआत कर सकें।

बरेली सेंट्रल जेल में होगा परीक्षा केंद्र

यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च 2026 तक आयोजित होंगी। मुरादाबाद जेल के इन परीक्षार्थियों की परीक्षा बरेली सेंट्रल जेल में कराई जाएगी। इसके लिए जेल प्रशासन ने न्यायालय और उच्च अधिकारियों से आवश्यक अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी की है और सुरक्षा व पारदर्शिता के सभी इंतजाम किए गए हैं।

UP Board Exam: बदलाव की दिशा में एक कदम

जेल प्रशासन की यह पहल बताती है कि सुधार और पुनर्वास की राह में शिक्षा अहम भूमिका निभा सकती है। सलाखों के पीछे रहते हुए भी पढ़ाई का मौका मिलने से बंदियों को नया लक्ष्य और उम्मीद मिल रही है। यह कदम न सिर्फ उनके भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

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