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उत्तराखंड में फॉरेस्ट फायर सीजन की तैयारी पूरी, मॉक ड्रिल आयोजित

उत्तराखंड में फॉरेस्ट फायर का सीजन 15 फरवरी से शुरू हो चुका है। राज्य का वन विभाग इसको लेकर पूरी तरह तैयार है। गुरुवार, 18 फरवरी को प्रदेशभर में फॉरेस्ट फायर मॉक ड्रिल आयोजित की गई। मुख्य वन संरक्षक सुशांत कुमार पटनायक के मुताबिक इस बार बारिश और बर्फबारी कम हुई है। इसका असर ड्राई सीजन पर पड़ा है, जिससे जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ गया है।

Uttarakhand news: उत्तराखंड में फॉरेस्ट फायर का सीजन 15 फरवरी से शुरू हो चुका है। राज्य का वन विभाग इसको लेकर पूरी तरह तैयार है। गुरुवार, 18 फरवरी को प्रदेशभर में फॉरेस्ट फायर मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इसमें सभी वन प्रभाग, राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण्य शामिल हुए। मॉक ड्रिल में आपदा प्रबंधन, राजस्व विभाग, पुलिस, SDRF, NDRF और चिकित्सा विभाग की टीमों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई। साथ ही वन पंचायत, ग्राम स्तरीय वनाग्नि सुरक्षा समितियां, महिला-युवा मंगल दल और स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी हिस्सा लिया।

इस सीजन में कितनी आग लगी और कितनी जमीन प्रभावित हुई

1 नवंबर 2025 से 18 फरवरी 2026 तक कुल 63 फॉरेस्ट फायर की घटनाएं दर्ज हुईं। इन घटनाओं में लगभग 35.91 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ। सिविल सोयम और वन पंचायत क्षेत्रों में लगभग 6.35 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ। जिलेवार विवरण, टोंस–पुरोला डिवीजन: 7 घटनाएं, 1.7 हेक्टेयर प्रभावित, चकराता डिवीजन: 6 घटनाएं, 0.5 हेक्टेयर प्रभावित, बद्रीनाथ–गोपेश्वर डिवीजन: 6 घटनाएं, 2.7 हेक्टेयर प्रभावित, अलकनंदा सोली कंजर्वेशन (गोपेश्वर): सिविल सोयम वन पंचायत क्षेत्र में 1 घटना, नंदा देवी नेशनल पार्क डिवीजन: 8 घटनाएं, 21.5 हेक्टेयर प्रभावित (4.5 हेक्टेयर सिविल सोयम) केदारनाथ वाइल्डलाइफ डिवीजन: 35 घटनाएं, 15.86 हेक्टेयर प्रभावित (1.85 हेक्टेयर सिविल सोयम)।

Uttarakhand news: पिछले 10 सालों का आंकड़ा

उत्तराखंड में पिछले 10 सालों में कुल 14,638 आग की घटनाएं हुईं, 23,697.77 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ, 35 लोगों की मौत और 66 लोग घायल हुए। वर्ष घटनाएं प्रभावित क्षेत्र (हेक्टेयर) मौतें घायल 2016 2074 4433.75 6 21, 2017 805 1244.64 – 1, 2018 2150 4480.04 – 6, 2019 2158 2981.55 1 15, 2020 135 172.69 2 1, 2021 2813 3943.89 8 3, 2022 2186 3425.05 2 7, 2023 773 933.55 3 3, 2024 1276 1771.66 13 7, 2025 268 310.95 – 2.

बारिश कम, ड्राई सीजन लंबा, आग का खतरा ज्यादा

Uttarakhand news: मुख्य वन संरक्षक सुशांत कुमार पटनायक के मुताबिक इस बार बारिश और बर्फबारी कम हुई है। इसका असर ड्राई सीजन पर पड़ा है, जिससे जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ गया है। इसी कारण राज्यभर में मॉक ड्रिल आयोजित की गई, ताकि आग लगने पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई की जा सके। फॉरेस्ट फायर से निपटने की तैयारियां, 1438 फॉरेस्ट फायर क्रू स्टेशन, 40 मास्टर फायर कंट्रोल रूम, 5600 फॉरेस्ट फायर वॉचर तैनात, हर फायर वॉचर का बीमा: 10 लाख रुपये, पटनायक ने बताया कि वन विभाग इस साल भी फॉरेस्ट फायर को रोकने और नियंत्रित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

 

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