ख़बर का असर

Home » News » EVM: ईवीएम से चुनाव कराने पर विकसित देशों का परहेज!

EVM: ईवीएम से चुनाव कराने पर विकसित देशों का परहेज!

EVM: ईवीएम से चुनाव कराने पर विकसित देशों का परहेज!

EVM: भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्रात्मक देश है। चुनाव मत पत्र के द्वारा वर्षों पहले भारत ने समाप्त कर दिया है, लेकिन जो विकसित देश लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं और जनसंख्याा की दृष्टि से छोटे हैं, वह मत पेटी पर ही विश्वास कर रहे हैं।

अमेरिका मत पेटी के जरिए ही चुनाव को राजी!

अमेरिका के राष्ट्रपति का साफ कहना है कि हमारा ईवीएम पर विश्वास नहीं है। इस पर ट्रंप एलन मस्क की चेतावनी है कि मत पेटी ही चुनाव कराने का सही ढ़ंग है। ईवीएम पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। अपने देश भारत में ही देख लीजिए, आये दिन हर चुनाव में ईवीएम विधि से चुनाव कराने पर जनता में विद्रोह ही फैल रहा है, कोई भी संतुष्ट नहीं है चुनाव की इस विधि से। बार-बार संदेह के वातावरण में पवित्र लोकतंत्र बदनाम हो रहा है। जब ऐसी परिस्थितियां हैं, तब चुनाव की इस प्रक्रिया को रोक कर अपनी पुरीनी विधि से चुनाव करवाने में क्या दिक्कत है ? आज भी ईवीएम से चुनाव करवाने के बाद कई दिन लग जाते हैं गणना करवाने में, तब इस इलेक्ट्रॉनिक विधि का क्या फायद! न समय की बचत और न ही जनता का विश्वास ईवीएम मशीन पर है। मस्क का तो साफ कहना है कि चुनाव के लिए ईवीएम मशीन बनी ही नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप भी इसी बात को दोहराते नजर आते हैं कि कंप्यूटर्स एक्सपर्ट से पूछा, तो सबका एक ही मत है कि चुनाव का सबसे सुरक्षित तरीका पेपर बैलेट है। यह बातें हाल ही में सामने आई हैं, जब एलन मस्क और राष्ट्रªपति ट्रंप ने ईवीएम चुनाव विधि को संदिग्ध माना। वह कहते हैं कि हम कंप्यूटर विधि से चुनाव पर कभी भरोसा नहीं करेंगे। अमेरिका में 98 प्रतिशत मत पेपर बैलेट से ही डाले जाते हैं।
दुनिया के 209 देशों में पेपर बैलेट से ही वोट डाले जा रहे हैं, जबकि सिर्फ 10 प्रतिशत देश हैं, जो इलैक्ट्रनिक वोटिंग कर रहे हैं।

EVM: ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे बड़े लोकतंत्र

इन देशों में सिर्फ पेपर बैलेट से सरकारें चुनी जा रही हैं। क्योंकि पेपर बैलेट पारदर्शी है। यह सत्यापन करने में योग्य विधि है। धांधली करने की इस विधि में वह गुंजाइश नहीं है- जैसे ईवीएम के द्वारा आये दिन हो रही हैं।भारत में चुनाव आयोग बार-बार अपनी सफाई में कहता आ रहा है कि चुनाव इवीएम मशीन से करवाने में कोई धांधली नहीं हो रही है, पर जिस सफाई से इस मशीन को कमांड देकर मतों को जोड़ा जाता है, उसमें हर वक्त गुंजाइश धांधली की ही है। दुनिया के ज्यादातर लोकतंत्र पेपर बैलेट पर भरोसा कर रहे हैं, क्योंकि वोटर अपने मत को देख सकते है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 2014 से पहले ईवीएम को चुनाव के लिए संदिग्ध बताया था। गुजरात के सीएम रहते हुए उन्होंने कहा था, ‘‘ईवीएम लोकतंत्र के लिए घातक है।’’ 2009 में भाजपा ने भी ईवीएम पर सवाल उठाये थे कि धांधली आसान है, बैलेट पेपर ही सही है।अब जब सत्ता मिली, तब मशीन सही! हार के कारणों पर जब विपक्ष सवाल उठाये, तो हार स्वीकार करने की सलाह से दी जाती है।ऐसी परिस्थितियों में चुनाव होते हैं, बहुमत आता है, सरकार बनती है, तो वह सत्ता पूरे कार्यकाल तक संदिग्ध सरकार के तौर पर बनी रहती है, जो स्वच्छ लोकतंत्र के लिए आदर्श नहीं है। इसलिए चुनाव प्रक्रिया को संदेह से दूर करने के लिए पेपर बैलेट को ही अपनाना चाहिए।

-भगवती प्रसाद डोभाल

ये भी पढ़े: अहमदाबाद में भारत की हार का असली विलेन कौन? जानिए किसने डुबो दी टीम इंडिया की नईया!

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

Share this post:

खबरें और भी हैं...

Live Video

लाइव क्रिकट स्कोर

Khabar India YouTubekhabar india YouTube poster

राशिफल