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मेरठ जैसी दरिंदगी अब लखनऊ में! ‘नीले ड्रम’ में मिली पिता की लाश, कलयुगी बेटे ने पढ़ाई के दबाव में किए शव के टुकड़े

लखनऊ में 'नीले ड्रम' में मिली पिता की लाश

UP News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक ऐसा रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है, जिसने कुछ समय पहले मेरठ में हुए चर्चित ‘ड्रम मर्डर केस’ की यादें ताजा कर दी हैं। एक बेटे ने अपनी ही हस्ती और वजूद को जन्म देने वाले पिता की न केवल गोली मारकर हत्या कर दी, बल्कि साक्ष्यों को मिटाने के लिए लाश के साथ जो बर्बरता की, उसने मानवीय संवेदनाओं को तार-तार कर दिया है। बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने अपने पिता मानवेंद्र प्रताप सिंह की हत्या कर उनके शव के कई टुकड़े किए और उन्हें एक ‘नीले ड्रम’ में भर दिया।

पढ़ाई का दबाव बना हत्या की वजह

पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ और जांच में जो खुलासा हुआ है, वह किसी भी माता-पिता और सभ्य समाज को डराने के लिए काफी है। आरोपी बेटा अक्षत प्रताप सिंह प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) की तैयारी कर रहा था। उसके पिता मानवेंद्र प्रताप सिंह चाहते थे कि उनका बेटा सफल होकर अधिकारी बने और एक सम्मानित जीवन जीए। इसी चाहत में वे अक्सर अक्षत को पढ़ाई के लिए टोकते थे और मेहनत करने के लिए प्रेरित (दबाव) करते थे।
अक्षत को पिता की यह नसीहतें और पढ़ाई के लिए कहना ‘नागवार’ गुजरने लगा। उसके मन में अपने ही पिता के प्रति नफरत का ऐसा गुबार भरा कि उसने उन्हें रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली।

पुलिस को नीले ड्रम में पन्नी के अंदर मानवेंद्र सिंह का धड़ पैक मिला।

UP News: कत्ल के बाद की बर्बरता

वारदात वाले दिन, अक्षत ने अपने पिता मानवेंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी। लेकिन उसकी सनक यहीं नहीं रुकी। वह जानता था कि लाश को एक साथ ठिकाने लगाना मुश्किल है, इसलिए उसने लाश को ठिकाने लगाने के लिए मेरठ के उस चर्चित कांड की तर्ज पर ‘नीले ड्रम’ का सहारा लिया। अक्षत ने बड़ी बेरहमी से पिता के शव को कई हिस्सों में काट दिया। उसने सिर और हाथ-पैर को अलग किया और उन्हें शहर के अलग-अलग सुनसान इलाकों में ले जाकर फेंक दिया ताकि लाश की शिनाख्त न हो सके। पुलिस के मुताबिक, अक्षत ने अंगों को ऐसी जगह फेंका जहाँ आवारा जानवर या सन्नाटा हो।

आरोपी अक्षत ने शरीर के अन्य हिस्सों को तो ठिकाने लगा दिया था, लेकिन पिता का ‘धड़’ अभी भी उसी नीले ड्रम में मौजूद था। वह धड़ को ठिकाने लगाने की योजना बना ही रहा था कि पड़ोसियों को दुर्गंध और घर में संदिग्ध गतिविधियों का शक हुआ। सूचना मिलते ही जब पुलिस मौके पर पहुँची और घर की तलाशी ली, तो नीले ड्रम का खौफनाक राज सामने आ गया। पुलिस ने खून से लथपथ धड़ बरामद किया और मौके से ही आरोपी बेटे अक्षत प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया।

मेरठ की घटना की पुनरावृत्त

इस घटना ने लखनऊ पुलिस और आम जनता के जेहन में मेरठ के उस मामले को ताजा कर दिया है, जहाँ इसी तरह एक नीले ड्रम का इस्तेमाल लाश को छिपाने के लिए किया गया था। अपराधी अब अपराध के नए और वीभत्स तरीके सोशल मीडिया और ‘क्राइम शो’ से सीख रहे हैं, जो पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। संजय कुमार राठौर के विश्लेषण के अनुसार, यह घटना केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के टूटते पारिवारिक ढांचे और युवाओं के गिरते मानसिक स्वास्थ्य का आईना है। पढ़ाई का दबाव, करियर की चिंता और संवाद की कमी युवाओं को इस कदर अवसाद और गुस्से में धकेल रही है कि वे अपनों के ही खून के प्यासे हो रहे हैं। एक पिता की हत्या केवल इसलिए कर देना कि वह पढ़ाई के लिए बोलता था, यह दर्शाता है कि रिश्तों में सहनशीलता खत्म हो चुकी है।

फॉरेंसिक टीम और पुलिस रात 2 बजे तक वारदात वाले घर में जांच करती रही।

फिलहाल, लखनऊ पुलिस ने आरोपी अक्षत के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने की संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन जगहों की तलाश कर रही है जहाँ अक्षत ने शव के अन्य अंगों (सिर और हाथ-पैर) को फेंका था। साथ ही, उस हथियार की भी तलाश की जा रही है जिससे गोली मारी गई और वह आरी या चाकू जिससे शव के टुकड़े किए गए।

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