Nirmala Sitaraman: केंद्र सरकार ने देश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को ‘नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन’ के दूसरे चरण (NMP 2.0) की आधिकारिक शुरुआत कर दी। इस योजना का लक्ष्य आगामी पांच वर्षों (वित्त वर्ष 2026-2030) में सरकारी संपत्तियों के जरिए 16.72 लाख करोड़ रुपये का राजस्व जुटाना है।
Nirmala Sitaraman: पिछले लक्ष्य से 2.6 गुना बड़ी योजना
NMP का यह दूसरा चरण पहले चरण के मुकाबले काफी व्यापक है। जहां पहले चरण में 6 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य था, वहीं NMP 2.0 का लक्ष्य उससे लगभग 2.6 गुना अधिक रखा गया है। नीति आयोग द्वारा तैयार किए गए इस रोडमैप में निजी क्षेत्र से करीब 5.8 लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद की गई है।
Nirmala Sitaraman: किन सेक्टर्स पर रहेगी नजर?
NMP 2.0 के तहत कुल 12 प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। सरकार अपनी इन संपत्तियों के ‘अनयूज्ड वैल्यू’ को अनलॉक करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
सड़क और परिवहन: राष्ट्रीय राजमार्ग, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क और रोपवे।
ऊर्जा और रेलवे: रेलवे स्टेशन और पावर ग्रिड लाइन्स।
खनन: कोयला और अन्य खनिज खदानें।
एविएशन और पोर्ट्स: हवाई अड्डों और बंदरगाहों के संचालन में निजी भागीदारी।
अन्य: दूरसंचार (Telecom), पर्यटन और शहरी बुनियादी ढांचा।
संपत्ति बेचना नहीं, पुनर्चक्रण है लक्ष्य
लॉन्च के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि सरकार अपनी संपत्तियों को बेच नहीं रही है, बल्कि उनका ‘एसेट रिसाइक्लिंग’ (Asset Recycling) कर रही है। उन्होंने कहा,”NMP 1.0 की सफलता ने हमें बड़े लक्ष्यों के लिए प्रेरित किया है। हम केवल उन संपत्तियों को निजी हाथों में पट्टे (Lease) पर दे रहे हैं जिनका वर्तमान में पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। इससे प्राप्त धन का उपयोग नए स्कूल, अस्पताल और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में होगा।”
अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति
नीति आयोग के परामर्श से तैयार इस योजना का उद्देश्य सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देना है। वित्त मंत्री ने विभागों को निर्देश दिया है कि मुद्रीकरण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि निवेशकों को किसी प्रकार की समस्या न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि NMP 2.0 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है, जिससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि देश का ढांचागत विकास भी तेजी से होगा।
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