Uttar Pradesh: शहरों में खुले नाले और गड्ढों को लेकर बार-बार उठते सवालों के बीच गाजियाबाद से एक और दर्दनाक घटना सामने आई है। स्कूटी से कूड़ा फेंकने जा रहे एक दुकानदार की खुले नाले में गिरने से मौत हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल ही में नोएडा में हुए हादसे के बावजूद सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए, जिसका खामियाजा अब एक और परिवार को भुगतना पड़ा।
दुकान बंद कर रोज की तरह निकले थे घर
जानकारी के अनुसार, पक्की मोरी इलाके के रहने वाले शंकरलाल की चौपला मार्केट के पास किराने की दुकान थी। उनका रोज का नियम था कि दुकान बंद करने के बाद कूड़ा नाले में डालकर पास के मंदिर होकर घर लौटते थे। रविवार देर रात भी वह प्लास्टिक की बाल्टी में कूड़ा लेकर स्कूटी से निकले, लेकिन घर नहीं पहुंच सके।
पटेल नगर फ्लाईओवर के पास सड़क पर उनकी स्कूटी गिरी हुई मिली, जिसकी लाइट जल रही थी। अंदेशा है कि इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से वह सड़क किनारे बने खुले नाले में जा गिरे और देर तक वहीं पड़े रहे।
Uttar Pradesh: राहगीर की नजर से खुला हादसे का राज
रात करीब 12 बजे एक राहगीर ने सड़क पर गिरी स्कूटी देखी और आसपास के लोगों को बुलाया। तलाश करने पर शंकरलाल नाले में मिले। स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें बाहर निकालकर सरकारी एमएमजी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस भी अस्पताल पहुंच गई और मामले की जानकारी जुटाई।
Uttar Pradesh: बाल्टी से बिगड़ा संतुलन, खुला नाला बना जानलेवा
पुलिस को शुरुआती जांच में आशंका है कि स्कूटी के हैंडल पर लटकी कूड़े की बाल्टी की वजह से वाहन का संतुलन बिगड़ा। स्कूटी सड़क पर गिर गई, जबकि शंकरलाल सीधे खुले नाले में जा गिरे। परिजनों के अनुरोध पर पोस्टमार्टम नहीं कराया गया।परिवार का कहना है कि अगर नाला ढका होता या उसके आसपास बैरिकेडिंग होती, तो यह हादसा टल सकता था। उन्हें घटना की जानकारी करीब डेढ़ घंटे बाद मिली, जिससे दर्द और बढ़ गया।
लोगों में गुस्सा, सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि एक महीने पहले ही नोएडा में खुले गड्ढे में गिरकर एक युवक की मौत हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद शहर में खुले नालों और खतरनाक जगहों को ढकने या घेरने के इंतजाम नहीं किए गए।नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन हादसों के बाद कुछ दिन सक्रिय होता है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकलता। इस घटना ने एक बार फिर शहरी सुरक्षा, खुले नालों की मरम्मत और जिम्मेदारी तय करने की मांग को तेज कर दिया है।शहर में लगातार सामने आ रहे ऐसे हादसे यह बताने के लिए काफी हैं कि बुनियादी ढांचे की खामियां जानलेवा साबित हो रही हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि खुले नालों को तुरंत ढका जाए, बैरिकेडिंग की जाए और संवेदनशील स्थानों पर रोशनी व चेतावनी संकेत लगाए जाएं, ताकि आगे कोई और परिवार इस तरह का दर्द न झेले।
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