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Cost of Renaming a State in India: किसी राज्य का नाम बदलने में कितना आता है खर्च और क्या है पूरी प्रक्रिया?

Cost of Renaming a State in India: किसी राज्य का नाम बदलने में कितना आता है खर्च और क्या है पूरी प्रक्रिया?

Cost of Renaming a State in India:  देश में राज्यों और शहरों के नाम बदलने को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। हाल ही में केरल का आधिकारिक नाम  केरलम करने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने की खबरों के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि किसी राज्य का नाम बदलने में आखिर कितना खर्च आता है और इसकी प्रक्रिया कितनी लंबी होती है।

करोड़ों में पहुंच सकता है कुल खर्च

विशेषज्ञों के अनुसार किसी राज्य या बड़े शहर का नाम बदलना केवल साइनबोर्ड बदलने तक सीमित नहीं होता। प्रशासनिक ढांचे, कानूनी दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और सार्वजनिक ढांचों में बड़े पैमाने पर बदलाव करने पड़ते हैं। अनुमान है कि ऐसे बदलाव पर 200 करोड़ से 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक का खर्च आ सकता है, हालांकि यह राशि राज्य के आकार और अपडेट की सीमा पर निर्भर करती है।सबसे बड़ा खर्च सार्वजनिक संकेतक और नाम पट्टिकाओं को बदलने में आता है। सड़क और हाईवे बोर्ड, रेलवे स्टेशन नेम प्लेट, एयरपोर्ट साइनेज, सरकारी भवनों के डिस्प्ले और अन्य सार्वजनिक जगहों पर लगे नामों को अपडेट करना पड़ता है। पिछले उदाहरणों में देखा गया है कि बड़े शहरों के नाम बदलने पर केवल रेलवे और परिवहन तंत्र में बदलाव के लिए ही करोड़ों रुपये खर्च हुए।

Cost of Renaming a State in India: सरकारी रिकॉर्ड और डिजिटल सिस्टम भी बदलते हैं

नाम बदलने के बाद सभी सरकारी विभागों को अपने लेटरहेड, आधिकारिक सील, पहचान पत्र, कार्यालय बोर्ड और कानूनी दस्तावेजों में संशोधन करना पड़ता है। यह प्रक्रिया राज्य और केंद्र स्तर पर हजारों कार्यालयों तक फैली होती है।इसके अलावा डिजिटल अपडेट भी एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। सरकारी वेबसाइट, भूमि रिकॉर्ड, पोस्टल डेटाबेस, कर प्रणाली, नक्शे और नेविगेशन प्लेटफॉर्म में नया नाम दर्ज करना पड़ता है। इन बदलावों के कारण तकनीकी और प्रशासनिक खर्च में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।

Cost of Renaming a State in India: निजी क्षेत्र पर भी पड़ता है असर

राज्य का नाम बदलने से केवल सरकार ही नहीं, निजी क्षेत्र पर भी असर पड़ता है। राज्य में पंजीकृत कंपनियों, बैंकों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य संगठनों को अपने दस्तावेज, ब्रांडिंग सामग्री, पते और अनुबंधों में बदलाव करना पड़ता है। इससे अप्रत्यक्ष आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।

पहले के उदाहरण

देश में पहले भी कई जगहों के नाम बदले जा चुके हैं। इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने के दौरान प्रशासनिक और बुनियादी ढांचे में बदलाव पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान सामने आया था। इसी तरह अन्य शहरों के नाम बदलने में भी अलग-अलग स्तर पर खर्च हुआ है।

Cost of Renaming a State in India: क्या है कानूनी प्रक्रिया

किसी राज्य का नाम बदलना संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत होता है। सबसे पहले राज्य विधानसभा प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजती है। इसके बाद गृह मंत्रालय विभिन्न विभागों से राय लेकर प्रभाव का आकलन करता है।फिर राष्ट्रपति की सिफारिश पर संसद में विधेयक पेश किया जाता है, जिसे लोकसभा और राज्यसभा से साधारण बहुमत से पारित होना होता है। संसद की मंजूरी और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद नया नाम आधिकारिक रूप से लागू हो जाता है।राज्य का नाम बदलना केवल प्रतीकात्मक फैसला नहीं होता, बल्कि यह एक व्यापक प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रिया है। इसलिए ऐसा कोई भी निर्णय लेने से पहले सरकारों को इसके आर्थिक और व्यवस्थागत प्रभावों का विस्तृत आकलन करना पड़ता है।

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