‘Bribery Pandit’ controversy: फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के विवादित शीर्षक को लेकर दायर आपराधिक परिवाद में जबलपुर की प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी पंकज सविता की अदालत ने परिवादी वैभव पाठक के बयान दर्ज कर लिए हैं। अदालत ने इस मामले में फिल्म के निर्माता-निर्देशक नीरज पांडे, ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स तथा उससे जुड़े विदेशी व भारतीय अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं।
अदालत द्वारा जिन लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें नेटफ्लिक्स के संस्थापक रीड हेस्टिंग्स, सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी टेड सरंदास, मुख्य सामग्री अधिकारी बेला बजरिया और भारत में नेटफ्लिक्स की वितरक मोनिका शेरगिल शामिल हैं।
परिवादी पक्ष की दलील
परिवादी की ओर से अधिवक्ताओं असीम त्रिवेदी, प्रशांत अवस्थी, पंकज तिवारी, प्रशांत सिरमोलिया, विनीत टेहेनगुरिया, रीतेश शर्मा, शुभम पाटकर और अरविंद सिंह चौहान ने अदालत में पक्ष रखा। वकीलों ने दलील दी कि भले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिल्म का शीर्षक बदला जा रहा हो, लेकिन उस शीर्षक के व्यापक प्रचार-प्रसार से ब्राह्मण समाज की प्रतिष्ठा को जो नुकसान पहुंचा है, वह अपूरणीय है।
‘Bribery Pandit’ controversy: सामाजिक अस्मिता का सवाल
अधिवक्ताओं ने कहा कि ‘पंडित’ शब्द भारतीय संस्कृति में विद्या, वैदुष्य और धार्मिक पवित्रता का प्रतीक है। लोकभाषा में प्रचलित ‘पंडत’ शब्द को जानबूझकर ‘घूसखोर’ जैसे कलंकित विशेषण से जोड़ना पूरे ब्राह्मण समुदाय की सामाजिक पहचान पर सीधा आघात है।
उन्होंने तर्क दिया कि यह मामला केवल किसी काल्पनिक पात्र या फिल्मी कहानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक पूरे वर्ग को बदनाम करने का सुनियोजित प्रयास है। जिस शब्द को पंडित जवाहरलाल नेहरू और पंडित अटल बिहारी वाजपेयी जैसी महान विभूतियों ने गौरव प्रदान किया, उसे ‘घूसखोर’ कहना भारतीय संस्कृति और परंपराओं का अपमान है।
आगे की कार्रवाई
अदालत ने नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। अब मामले की अगली सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि आरोपों के आधार पर आगे की आपराधिक कार्रवाई किस दिशा में बढ़ेगी।
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