Kejriwal-Sisodia acquitted: अदालत के इस फैसले का असर सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका फायदा पूरे देश की राजनीति में देखने को मिल सकता है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और अरविन्द केजरीवाल को शराब नीति से जुड़े मामले में बरी कर दिया गया है। साथ ही इस केस में शामिल पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया सहित कुल 21 अन्य लोगों को भी राहत मिली है।
पंजाब-गोवा चुनावों पर असर संभव
इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल देखा गया। लंबे समय बाद पार्टी के अंदर नई ऊर्जा और उत्साह महसूस किया जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस केस से बरी होने के बाद पार्टी और केजरीवाल की राजनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि पार्टी इस मौके का फायदा किस तरह उठाती है और अपने समर्थन को कैसे बनाए रखती है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस फैसले का फायदा सिर्फ दिल्ली में ही नहीं बल्कि पूरे देश में AAP को मिल सकता है। खासकर पंजाब और गोवा जैसे राज्यों में, जहां अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है, वहां पार्टी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।

Kejriwal-Sisodia acquitted: विपक्ष की रणनीति पर पड़ेगा असर
इसके अलावा आने वाले साल के अंत में दिल्ली में नगर निगम चुनाव भी होने वाले हैं। सूत्रों का कहना है कि इस फैसले से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और वे नए जोश के साथ काम करेंगे।
राजनीतिक जानकारों का यह भी कहना है कि इस फैसले के बाद दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे देश में AAP को फायदा मिलने की संभावना है। इससे विपक्ष की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आगे चलकर भाजपा को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है।
राष्ट्रीय राजनीति में केजरीवाल की पकड़ मजबूत
केजरीवाल की छवि में सुधार होने की संभावना है और पार्टी जनता के बीच सहानुभूति हासिल करने के लिए देशभर में बड़ा अभियान भी चला सकती है। जो नेता पार्टी छोड़ने की सोच रहे थे, वे भी अब अपने फैसले पर दोबारा विचार कर सकते हैं। साथ ही केजरीवाल राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं।
दूसरी ओर, बीजेपी को भी आने वाले समय में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर AAP और केजरीवाल को घेरने के लिए नई रणनीति बनानी पड़ सकती है। वहीं, यह फैसला कांग्रेस के लिए भी राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस फैसले के बाद पंजाब और दिल्ली में AAP की स्थिति मजबूत होती है तो इसका सबसे ज्यादा असर कांग्रेस की राजनीति पर पड़ सकता है।
Written by- Adarsh kathane
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