Bihar News: बिहार की राजनीति में कुछ नेता ऐसे होते हैं जिनका प्रभाव समय के साथ घटता नहीं, बल्कि और मजबूत होता चला जाता है। ऐसे ही एक कद्दावर और अनुभवी नेता हैं विजेंद्र प्रसाद यादव जिन्हें राज्य की राजनीति में ‘अजात शत्रु’ के रूप में जाना जाता है। करीब 79 वर्ष की उम्र में भी उनका राजनीतिक प्रभाव पहले जैसा ही मजबूत माना जाता है।
9 बार विधानसभा चुनाव जीत चुके यादव
सुपौल जिले से आने वाले विजेंद्र प्रसाद यादव वर्तमान में सुपौल विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और वे अब तक लगातार 9 बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। यह उपलब्धि उन्हें बिहार के उन चुनिंदा नेताओं की श्रेणी में खड़ा करती है, जो अपने क्षेत्र में लगातार अजेय बने हुए हैं। स्थानीय लोग उन्हें सम्मानपूर्वक ‘कोसी का विश्वकर्मा’ भी कहते हैं, क्योंकि क्षेत्र के विकास में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है।
Bihar News: सख्त प्रशासनिक रवैया
उनका राजनीतिक सफर 1990 में शुरू हुआ था, जब उन्होंने जनता दल के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा। इसके बाद 1995 में भी उन्होंने जीत दर्ज की और राज्य सरकार में ऊर्जा विभाग में राज्य मंत्री बने। आगे चलकर वे राबड़ी देवी सरकार में भी मंत्री रहे और प्रशासनिक अनुभव हासिल किया। वर्ष 2000 के बाद उन्होंने जनता दल (यूनाइटेड) के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखी और लगातार चुनाव जीतते रहे। विजेंद्र प्रसाद यादव को विशेष रूप से ऊर्जा और विकास विभाग में उनके लंबे कार्यकाल के लिए जाना जाता है। उनके समर्थकों का दावा है कि उनके कार्यकाल में बिहार ने बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखा और राज्य ‘ढिबरी युग’ से आधुनिक बिजली और एलईडी युग की ओर बढ़ा। सीमांचल और मिथिलांचल जैसे क्षेत्रों में विकास योजनाओं को लागू करने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या है विजेंद्र प्रसाद की खास पहचान?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका सख्त प्रशासनिक रवैया है। कहा जाता है कि यदि वे किसी कार्य की समय–सीमा तय कर दें, तो वह हर हाल में पूरी करनी होती है। इसी कार्यशैली ने उन्हें एक अनुशासित और परिणाम देने वाले नेता की छवि दी है। विजेंद्र प्रसाद यादव की एक और खास पहचान यह भी मानी जाती है कि वे जाति की राजनीति से ऊपर उठकर ‘जमात’ यानी सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की राजनीति करते हैं। यही वजह है कि सुपौल में उन्हें हर वर्ग का मजबूत समर्थन मिलता रहा है।
उनकी राजनीतिक यात्रा की एक और बड़ी विशेषता यह है कि अब तक उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ है और न ही किसी तरह का गंभीर कानूनी विवाद सामने आया है। यह उन्हें बिहार के अन्य कई नेताओं से अलग पहचान देता है। सुपौल की राजनीति में उनका दबदबा इतना मजबूत माना जाता है कि कई बार उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को भारी हार का सामना करना पड़ा है। जनता के बीच उनकी सीधी पहुंच, विकास कार्यों की छवि और लगातार जीत ने उन्हें बिहार की राजनीति का एक ऐसा चेहरा बना दिया है, जिसे हर कोई सम्मान और रणनीतिक दृष्टि से देखता है।








