Iran Crisis: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़े हैं। कूटनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दूरगामी असर डाल सकता है। अमेरिका और इजरायल से जुड़े इस सैन्य घटनाक्रम के बाद तेहरान की जवाबी कार्रवाई ने तनाव को और बढ़ा दिया है।
मध्य पूर्व में तनाव और आर्थिक झटका
भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सिकरी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बंद होने और होर्मुज स्ट्रेट के लगभग ठप पड़ने से ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
Iran Crisis: कूटनीतिक प्रयासों पर सवाल
सिकरी के अनुसार, यह घटनाक्रम उस समय हुआ जब ओमान की मध्यस्थता में जिनेवा में वार्ता चल रही थी। शुरुआती संकेत सकारात्मक थे, लेकिन हमले ने इन प्रयासों को खोखला साबित कर दिया। उनका मानना है कि पहले कदम इजरायल ने उठाया, बाद में अमेरिका भी इसमें शामिल हुआ।
शासन परिवर्तन पर संशय
पूर्व राजनयिक केपी फैबियन ने इसे सैन्य सफलता तो माना, लेकिन ईरान में शासन परिवर्तन की संभावना पर संदेह जताया। वहीं महेश कुमार सचदेव ने कहा कि खामेनेई ने दशकों तक व्यावहारिकता और वैचारिक दृढ़ता के बीच संतुलन बनाए रखा। विशेषज्ञों का मानना है कि उनका जाना क्षेत्रीय संतुलन को तोड़ सकता है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर लंबे समय तक दिखेगा।






