India Oil Import Routes: ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक तेल बाजार में चिंता बढ़ा दी है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में गिना जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित होता है तो क्या भारत के लिए तेल आयात के रास्ते बंद हो जाएंगे।असल में भारत के पास तेल आयात के लिए कई वैकल्पिक समुद्री मार्ग मौजूद हैं, जिनके जरिए अलग-अलग देशों से कच्चा तेल भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचता है। यही वजह है कि किसी एक मार्ग में बाधा आने पर भी पूरी सप्लाई पूरी तरह ठप नहीं होती।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के बड़े तेल टैंकर इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं।
आंकड़ों के अनुसार हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल इसी मार्ग से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। इस तेल का बड़ा हिस्सा एशियाई देशों जैसे भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया तक जाता है। इसलिए इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट का असर सबसे ज्यादा एशिया पर पड़ता है।
India Oil Import Routes: मलक्का जलडमरूमध्य का अहम रोल
मलक्का स्ट्रेट मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच स्थित दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र से आने वाला तेल इसी रास्ते से होकर अंडमान सागर और फिर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचता है।दुनिया के लगभग 29 प्रतिशत समुद्री तेल परिवहन का हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्र या अमेरिका से आने वाला तेल भी कई बार इसी रास्ते से भारत पहुंचता है।
India Oil Import Routes: बाब अल-मंडेब मार्ग भी महत्वपूर्ण
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य अदन की खाड़ी को लाल सागर से जोड़ता है। अफ्रीकी देशों और यूरोप से आने वाला तेल इसी रास्ते से होकर भारतीय महासागर में प्रवेश करता है और फिर भारत के बंदरगाहों तक पहुंचता है।हालांकि इस क्षेत्र में कभी-कभी सुरक्षा चुनौतियां देखने को मिलती हैं, लेकिन फिर भी यह होर्मुज का एक अहम विकल्प माना जाता है।
स्वेज नहर से भी आता है तेल
स्वेज नहर भूमध्य सागर और लाल सागर को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है। यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और रूस से आने वाले जहाज अक्सर इसी मार्ग का उपयोग करते हैं।
भारत के लिए यह रास्ता इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे समुद्री दूरी कम हो जाती है और तेल जल्दी भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकता है।
केप ऑफ गुड होप सबसे लंबा लेकिन सुरक्षित रास्ता
जब लाल सागर या होर्मुज जैसे क्षेत्रों में तनाव बढ़ता है, तब कई तेल टैंकर अफ्रीका के दक्षिणी छोर से गुजरने वाले केप ऑफ गुड होप मार्ग को चुनते हैं।यह रास्ता लंबा जरूर है और इसमें ज्यादा समय और खर्च लगता है, लेकिन इसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। युद्ध या संघर्ष की स्थिति में कई देशों के जहाज इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं।
भारत किन देशों से मंगाता है तेल
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कई देशों से कच्चा तेल आयात करता है। वर्तमान में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है। इसके अलावा इराक और सऊदी अरब भी लंबे समय से भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता रहे हैं।संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत से भी बड़ी मात्रा में तेल भारत आता है। हाल के वर्षों में भारत ने अमेरिका से तेल आयात भी तेजी से बढ़ाया है। इसके अलावा नाइजीरिया और अंगोला जैसे अफ्रीकी देशों से भी कच्चा तेल खरीदा जाता है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत की रणनीति
वैश्विक संकटों को देखते हुए भारत अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। सरकार तेल आयात के स्रोतों को विविध बनाने की कोशिश कर रही है ताकि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता न रहे।इसके साथ ही देश में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार भी बनाए जा रहे हैं, ताकि आपात स्थिति में कुछ समय तक देश की ऊर्जा जरूरतें बिना नए आयात के भी पूरी की जा सकें।विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग समुद्री मार्गों और विविध आयात स्रोतों के कारण भारत की तेल आपूर्ति व्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है, जिससे वैश्विक संकट के समय भी देश को कुछ हद तक सुरक्षा मिलती है।
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