BJP-TMC clash: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के बीच हुई झड़प को लेकर सियासी संग्राम तेज हो गया है। शनिवार को हुई इस घटना के बाद पुलिस ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि दोनों दल एक-दूसरे पर हिंसा भड़काने के आरोप लगा रहे हैं।
पीएम मोदी की रैली से पहले भड़का विवाद
जानकारी के मुताबिक यह टकराव कोलकाता के गिरिश पार्क इलाके में उस समय हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होने वाले कार्यक्रम से पहले भाजपा और टीएमसी के समर्थक आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच झड़प शुरू हो गई। इस दौरान कोलकाता पुलिस के एक इंस्पेक्टर और पश्चिम बंगाल सरकार की मंत्री शशि पंजा के घायल होने की खबर सामने आई।
BJP-TMC clash: पुलिस कार्रवाई, चार लोगों की गिरफ्तारी
घटना के बाद पुलिस ने रातभर अभियान चलाकर चार लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें तीन भाजपा समर्थकों कृषाणु बोस, सनी डे और चरणजीत सिंह के नाम सामने आए हैं। हालांकि इस मामले में अभी तक किसी भी दल ने औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज नहीं कराई है। इसके बावजूद कोलकाता पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी।
भाजपा ने पुलिस पर लगाया पक्षपात का आरोप
भाजपा नेताओं का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री की रैली में जा रहे समर्थकों की बस पर हमला किया और हिंसा की शुरुआत भी उन्हीं की ओर से हुई। कोलकाता नगर निगम के भाजपा पार्षद सजल घोष ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि गिरफ्तार किए गए तीनों भाजपा समर्थक उस समय घटनास्थल के आसपास मौजूद ही नहीं थे। उन्होंने पुलिस से सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल टावर लोकेशन सार्वजनिक करने की मांग की है।
BJP-TMC clash: टीएमसी ने भाजपा पर साधा निशाना
वहीं अभिषेक बनर्जी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि मंत्री शशि पांजा का घायल होना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति उकसावे और डर का माहौल बनाने पर आधारित है। उनके मुताबिक बाहर से आए लोग बंगाल में शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
चुनाव आयोग ने मांगी रिपोर्ट
इस पूरे घटनाक्रम पर चुनाव आयोग ने भी सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार से झड़प को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही मंत्री शशि पांजा के आवास पर हुए हमले को लेकर राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से भी रिपोर्ट तलब की गई है। आयोग ने यह भी पूछा है कि चुनाव के मद्देनजर पहले से तैनात केंद्रीय अर्धसैनिक बलों का इस्तेमाल स्थिति नियंत्रित करने के लिए क्यों नहीं किया गया।
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