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30 अप्रैल बना खास दिन: जानें शुभ-अशुभ समय, रवि योग और पूजा का सही मुहूर्त

30 अप्रैल शुभ मुहूर्त

30 April Panchang: हर दिन का अपना महत्व और सही समय होता है, जिसे देखकर ही हिंदू धर्म में शुभ कार्य किए जाते हैं। 30 अप्रैल का दिन खास माना जा रहा है क्योंकि इस दिन गुरुवार के साथ नरसिंह जयंती और छिन्नमस्ता जयंती भी मनाई जा रही है। इस वजह से इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

तिथि और समय की जानकारी

इस दिन चतुर्दशी तिथि रात 9 बजकर 12 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। हालांकि इस दिन भद्रा और राहुकाल का प्रभाव भी रहेगा, इसलिए कोई भी जरूरी या शुभ काम करते समय समय का ध्यान रखना जरूरी है।

30 April Panchang: 30 अप्रैल शुभ मुहूर्त
30 अप्रैल शुभ मुहूर्त

30 April Panchang:  गुरुवार का धार्मिक महत्व

गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु को पीले वस्त्र अर्पित करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए व्रत, पूजा और अनुष्ठान करते हैं। ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से भगवान प्रसन्न होते हैं।

शुभ मुहूर्त की जानकारी

दृक पंचांग के अनुसार, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 16 मिनट से 4 बजकर 49 मिनट तक रहेगा, जो पूजा और ध्यान के लिए बहुत अच्छा समय माना जाता है। इसके अलावा गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 55 मिनट से 7 बजकर 15 मिनट तक रहेगा, जबकि अमृत काल शाम 7 बजकर 20 मिनट से 9 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। इन समयों में किए गए कार्य शुभ माने जाते हैं।

30 अप्रैल शुभ मुहूर्त
30 अप्रैल शुभ मुहूर्त

रवि योग का महत्व

30 अप्रैल को रवि योग भी बन रहा है, जो सुबह 5 बजकर 42 मिनट से लेकर रात 2 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। इसे बहुत ही शुभ योग माना जाता है। मान्यता है कि इस समय सूर्य और चंद्रमा की स्थिति अनुकूल होती है, जिससे किए गए कार्य सफल होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दौरान दान करना भी बहुत लाभकारी माना गया है।

अशुभ समय की जानकारी

इस दिन कुछ अशुभ समय भी रहेंगे, जिनमें महत्वपूर्ण कार्य करने से बचना चाहिए। राहुकाल दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 3 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 9 बजकर 1 मिनट से 10 बजकर 40 मिनट तक रहेगा, वहीं वर्ज्य काल सुबह 8 बजकर 56 मिनट से 10 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। यमगण्ड काल सुबह 5 बजकर 42 मिनट से 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगा और दुर्मुहूर्त सुबह 10 बजकर 7 मिनट के आसपास रहेगा। भद्रा काल रात 9 बजकर 12 मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह 5 बजकर 42 मिनट तक रहेगा।

कुल मिलाकर, 30 अप्रैल का दिन धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले सही मुहूर्त का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि काम बिना किसी रुकावट के सफल हो सके।

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