Suvendu Adhikari: सुवेंदु अधिकारी ने आगामी विधानसभा चुनाव में दो सीटों से चुनाव लड़ने की अटकलों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता हैं और पार्टी नेतृत्व जो भी निर्णय करेगा, उसे स्वीकार करेंगे। कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा में सभी फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं और उम्मीदवारों का चयन भी उसी प्रक्रिया के तहत होता है।
नंदीग्राम और भवानीपुर हो सकती हैं संभावित सीटें
राजनीतिक चर्चाओं में जिन दो सीटों का नाम सामने आ रहा है, उनमें नंदीग्राम और भवानीपुर शामिल हैं। नंदीग्राम सीट से सुवेंदु अधिकारी पहले भी दो बार विधायक रह चुके हैं। वह 2016 से 2021 तक टीएमसी के टिकट पर और 2021 से भाजपा के प्रतिनिधि के रूप में इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
Suvendu Adhikari: नंदीग्राम मेरी पहली पसंद: अधिकारी
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर उनकी पहली पसंद नंदीग्राम सीट ही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर पार्टी नेतृत्व उन्हें किसी दूसरी सीट से भी चुनाव लड़ने के लिए कहता है तो वह इस पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा में संगठन सर्वोपरि है और कार्यकर्ताओं को पार्टी के फैसले का सम्मान करना चाहिए।
2021 में ममता बनर्जी को हराकर बने थे चर्चा में
2021 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट से चुनाव जीतकर ममता बनर्जी को हराया था। यह चुनाव राज्य की राजनीति का सबसे चर्चित मुकाबला माना गया था। बाद में ममता बनर्जी ने उपचुनाव में भवानीपुर सीट से जीत हासिल की और तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं।
Suvendu Adhikari: भवानीपुर से लड़ने पर बढ़ सकता है सियासी दबाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सुवेंदु अधिकारी नंदीग्राम के साथ-साथ भवानीपुर से भी चुनाव लड़ते हैं, तो यह भाजपा की एक रणनीतिक चाल हो सकती है। इससे ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट पर अधिक ध्यान देना पड़ सकता है, जिससे राज्य के अन्य हिस्सों में उनके प्रचार अभियान का समय सीमित हो सकता है।
मतदाता सूची में बदलाव भी बना चर्चा का विषय
हाल ही में जारी अंतिम मतदाता सूची के अनुसार भवानीपुर क्षेत्र में 47,111 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जबकि 14,154 मतदाताओं के मामले न्यायिक प्रक्रिया में लंबित बताए जा रहे हैं। ऐसे में आगामी चुनाव में यह सीट पहले से ज्यादा दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण बन सकती है।
ये भी पढ़े… बंगाल में 8 से 2 चरण में चुनाव, क्या बदलेगा सियासी खेल?







