Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों और हाईकोर्ट में मुकदमों के फैसलों में देरी को लेकर दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। यह याचिका अदालतों में मौखिक फैसला सुनाए जाने के बाद लिखित आदेश जारी करने में होने वाली देरी से जुड़ी है।
यह किसी एक जज का मामला नहीं: सीजेआई
सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह मामला किसी एक जज से जुड़ा नहीं है, बल्कि पूरी न्यायिक व्यवस्था में सुधार से संबंधित है। उन्होंने कहा कि जिस जज के मामले की वजह से यह मुद्दा उठा, वे भी फौजदारी कानून के बेहतरीन जज हैं।
Supreme Court: ज्यादा मामलों के दबाव से आती हैं दिक्कतें
सीजेआई ने माना कि कई बार ज्यादा मामलों का निपटारा करने की जल्दबाजी में कुछ समस्याएं आ जाती हैं। उन्होंने कहा कि जजों के पास भी दिन के केवल 24 घंटे होते हैं, इसलिए समय प्रबंधन और कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए संस्थागत सुधार जरूरी हैं।
हाईकोर्ट से मांगी गईं सिफारिशें
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एमिकस क्यूरी की ओर से दिए गए सुझावों की सराहना की। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन सिफारिशों की सॉफ्ट कॉपी सभी हाईकोर्ट को भेजी जाए और वे 10 दिनों के भीतर अपनी राय अदालत को दें।
Supreme Court: फैसलों की कॉपी मिलने में होती है देरी
याचिका में कहा गया है कि कई मामलों में अदालतें मौखिक रूप से फैसला सुना देती हैं, लेकिन लिखित आदेश और फैसले की कॉपी मिलने में कई हफ्तों या महीनों तक का समय लग जाता है। इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुधार और जवाबदेही की मांग की गई है।







