Coal Stock In India: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर मंडराते खतरे के बीच भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। एलपीजी सप्लाई पर संभावित असर की आशंकाओं के बीच देश के ऊर्जा क्षेत्र से राहत भरी खबर आई है। भारत ने पहली बार इतना विशाल कोयला भंडार जमा कर लिया है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में बिजली व्यवस्था को स्थिर रखा जा सकेगा।
इतिहास का सबसे बड़ा कोयला भंडार
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में इस समय करीब 21 करोड़ टन कोयला मौजूद है। यह भंडार इतना बड़ा है कि अगर अचानक उत्पादन रुक भी जाए, तो भी मौजूदा खपत के हिसाब से लगभग 88 दिनों तक देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी की जा सकती हैं।यह उपलब्धि न सिर्फ बिजली संकट की आशंकाओं को कम करती है, बल्कि बढ़ती गर्मी के दौरान बढ़ने वाली मांग को भी संभालने में मददगार होगी।
Coal Stock In India: बिजलीघरों और खदानों में रिकॉर्ड स्टॉक
देश के तापीय बिजलीघरों में फिलहाल लगभग 5.41 करोड़ टन कोयला मौजूद है, जो करीब 24 दिनों तक लगातार बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त है। वहीं, खदानों के पास 15 करोड़ टन से अधिक का पिटहेड स्टॉक जमा है।इतना बड़ा भंडार पहली बार देखने को मिला है, जो सप्लाई चेन की मजबूती और बेहतर योजना का संकेत देता है।
Coal Stock In India: तेज सप्लाई चेन ने बदली तस्वीर
रेल और सड़क मार्ग के जरिए कोयले की ढुलाई में सुधार ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है। मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल के कारण खदानों से बिजलीघरों तक कोयले की आपूर्ति अब पहले से कहीं ज्यादा तेज और सुचारु हो गई है।इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी क्षेत्र में बिजली उत्पादन प्रभावित न हो।
अगर LPG खत्म हुई तो क्या होगा?
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में वैश्विक संकट का असर पड़ सकता है। लेकिन इस स्थिति में कोयला आधारित बिजली सबसे बड़ा सहारा बन सकती है।अगर रसोई गैस की कमी होती है, तो लोग इंडक्शन कुकर और इलेक्ट्रिक चूल्हों की ओर शिफ्ट हो सकते हैं। चूंकि देश की करीब 70% बिजली कोयले से बनती है, इसलिए यह मजबूत स्टॉक बढ़ती बिजली मांग को संभालने में सक्षम रहेगा।
Coal Stock In India: भीषण गर्मी में बढ़ेगी बिजली की मांग
मौसम विभाग ने इस साल अधिक गर्मी पड़ने के संकेत दिए हैं, जिससे एयर कंडीशनर और कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ेगा। ऐसे में बिजली की खपत भी तेजी से बढ़ेगी।
हालांकि, इस बार कोयले का रिकॉर्ड स्टॉक इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पहले से तैयार है, जिससे ब्लैकआउट जैसी स्थिति से बचा जा सकेगा।
सरकार की रणनीति: पहले तैयारी, फिर राहत
सरकार की प्राथमिकता साफ है संकट आने से पहले ही पर्याप्त भंडार तैयार रखना। कोयला मंत्रालय और रेल मंत्रालय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि सप्लाई में कोई रुकावट न आए।जहां एलपीजी के लिए भारत विदेशों पर निर्भर है, वहीं कोयले के मामले में देश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है।वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत का यह रिकॉर्ड कोयला भंडार देश के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो रहा है। एलपीजी संकट की आशंका के बावजूद बिजली व्यवस्था को स्थिर रखने की पूरी तैयारी है।
यानी साफ हैअगर गैस कम पड़ी, तो भी देश की रफ्तार नहीं रुकेगी।
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