Iran-Israel war: डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर नाटो पर तीखा हमला बोलते हुए इसे “अमेरिका के बिना कागजी शेर” करार दिया है। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के बिना नाटो “कागजी शेर” है और सहयोगी देशों के रवैये को “कायरता” करार दिया।
क्या कहा ट्रंप ने?
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि नाटो की ताकत पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर है। उन्होंने सहयोगी देशों के रवैये को “कायरता” बताते हुए आरोप लगाया कि वे कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारी लेने से बचते हैं।
Iran-Israel war: बयान की वजह क्या है?
ट्रंप की यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते तनाव के बीच नाटो के सैन्य कार्रवाई में शामिल न होने की खबरें सामने आईं। इस पर नाराजगी जताते हुए ट्रंप ने कहा कि जब वैश्विक सुरक्षा की बात आती है, तो गठबंधन के अन्य देश पीछे हट जाते हैं और सारा बोझ अमेरिका पर छोड़ देते हैं।
सोशल मीडिया पर क्या लिखा?
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा: अमेरिका के बिना नाटो कमजोर है, सहयोगी देश जोखिम उठाने से बचते हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम मुद्दों पर भी सक्रिय भूमिका नहीं निभाई जा रही है।
Iran-Israel war: ऊर्जा और वैश्विक राजनीति का मुद्दा
ट्रंप ने यह भी कहा कि चीन , जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं, लेकिन इसके बावजूद वे इस क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आगे नहीं आ रहे।
पहले भी उठा चुके हैं सवाल
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने नाटो की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अपने पिछले कार्यकाल के दौरान भी वे कई बार कह चुके हैं कि अमेरिका अपने सहयोगियों पर जरूरत से ज्यादा खर्च करता है, जबकि बदले में अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता।
Iran-Israel war: बढ़ सकता है वैश्विक तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस बयान से वैश्विक शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब मध्य-पूर्व पहले से ही संवेदनशील स्थिति में है। कुल मिलाकर, यह बयान केवल नाटो की आलोचना नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में अमेरिका की भूमिका और सहयोगियों की जिम्मेदारी को लेकर एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।
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