Government All-Party Meeting: पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत पर इसके आर्थिक और सुरक्षा प्रभावों को लेकर बढ़ती चिंताओं के मद्देनज़र केंद्र सरकार आज सर्वदलीय बैठक आयोजित करने जा रही है। यह बैठक बुधवार शाम 5 बजे संसद परिसर में होगी। वहीं ट्रंप ने कल पीएम मोदी को फोन कॉल कर पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा की.
कौन करेगा बैठक की अध्यक्षता
बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर राजनीतिक दलों के नेताओं को ताज़ा हालात और भारत की कूटनीतिक रणनीति की जानकारी देंगे।यह बैठक बुधवार शाम 5 बजे संसद भवन में होगी, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे. बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू समेत कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहेंगे. विदेश सचिव विक्रम मिस्री के भी बैठक में शामिल होने की संभावना है.
Government All-Party Meeting: पीएम के बयान के बाद अहम कदम
यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में दिए गए बयानों के बाद बुलाई गई है, जिसमें उन्होंने मौजूदा हालात को “अभूतपूर्व संकट” बताया था। पीएम ने चेतावनी दी थी कि इस संकट के प्रभाव लंबे समय तक रह सकते हैं।
होर्मुज और ऊर्जा संकट पर चिंता
पश्चिम एशिया का संघर्ष अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम मार्ग पर तनाव के कारण तेल, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पर असर पड़ा है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है और महंगाई को लेकर भी चिंता गहराई है।
Government All-Party Meeting: विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केवल ब्रीफिंग के बजाय पूर्ण बहस की जरूरत बताई है। वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए, हालांकि उन्होंने सर्वदलीय बैठक का स्वागत किया है।
सुरक्षा समीक्षा के बाद अगला कदम
यह बैठक हाल ही में हुई उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा के बाद हो रही है, जिसमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और अनिल चौहान जैसे शीर्ष रक्षा अधिकारी शामिल हुए थे।
Government All-Party Meeting: क्या है बैठक का मकसद
इस सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य विपक्षी नेताओं को मौजूदा हालात से अवगत कराना और इस वैश्विक संकट पर भारत के रुख को लेकर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाना है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। इससे न सिर्फ सरकार की रणनीति स्पष्ट होगी, बल्कि यह भी तय होगा कि इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए देश किस दिशा में आगे बढ़ेगा।







