Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और हुमायूं कबीर की ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ के संभावित गठबंधन को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। इस पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि किसी भी राजनीतिक प्रयोग का अंतिम फैसला जनता ही करती है।
दिलीप घोष का बयान
भाजपा नेता दिलीप घोष ने न्यू टाउन में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “जनता किसे पसंद करेगी या नहीं करेगी, यह वही तय करेगी।” उन्होंने कहा कि ओवैसी लंबे समय से पश्चिम बंगाल में अपनी राजनीतिक जमीन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
Bengal Election 2026: गठबंधन की कोशिशें
घोष ने बताया कि इससे पहले भी वामपंथी दलों के साथ संभावित गठबंधन की चर्चा हुई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई। अब ओवैसी हुमायूं कबीर के साथ मिलकर नई रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई नया राजनीतिक प्रयोग होता है, तो उसकी सफलता या असफलता जनता तय करेगी।
जमीन पर उतरने की चुनौती
गठबंधन की सफलता पर सवाल उठाते हुए दिलीप घोष ने कहा कि AIMIM को पहले जमीनी स्तर पर खुद को साबित करना होगा। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता किसी नई पार्टी को आसानी से स्वीकार नहीं करती और इसके लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है।
Bengal Election 2026: वोट बैंक पर सियासत
ओवैसी के आने से वोट कटने की आशंका पर उन्होंने कहा कि भाजपा को इससे कोई नुकसान नहीं होगा। उनके अनुसार, ओवैसी और तृणमूल कांग्रेस दोनों का फोकस मुस्लिम वोट बैंक पर रहता है। ऐसे में यदि वोटों का बंटवारा होता है, तो इसका असर ममता बनर्जी की पार्टी पर ही पड़ेगा।
ममता और विपक्ष पर हमला
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा भाजपा और चुनाव आयोग के बीच गठजोड़ के आरोपों पर घोष ने पलटवार करते हुए कहा कि यह पुराने आरोप हैं और इनका कोई आधार नहीं है। वहीं, राहुल गांधी के केंद्र सरकार पर लगाए गए आरोपों पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी और कहा कि उन्हें अपनी पार्टी पर ध्यान देना चाहिए।
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले गठबंधन की इस नई चर्चा ने राजनीतिक समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है। अब यह देखना अहम होगा कि ओवैसी और हुमायूं कबीर का यह संभावित गठबंधन चुनावी मैदान में कितना असर डाल पाता है और जनता इसे किस रूप में स्वीकार करती है।
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