Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव से पहले बयानबाजी तेज हो गई है। आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि वह बंगाली भाषी मुस्लिमों के लिए काम कर रहे हैं, जबकि असदुद्दीन ओवैसी गैर-बंगाली मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बता दें कि पश्चिम बंगाल में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम और हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी मिलकर चुनाव लड़ेंगी।
ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर कर देगी
इस बीच हुमायूं कबीर ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि मैं यहां बंगालीभाषी मुसलमानों के लिए हूं और असदुद्दीन ओवैसी गैर-बंगाली मुसलमानों के लिए हैं। उन्होंने आगे दावा किया कि उनकी और ओवैसी की जोड़ी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर कर देगी। उन्होंने चुनावी रणनीति को लेकर भी बड़ा ऐलान किया। कबीर ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से करीब 200 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इस बीच, हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का काम चल रहा है। इसे वहीं बनने दीजिए। यह अयोध्या नहीं है बल्कि यह बंगाल का मुर्शिदाबाद है। काम जारी है और हम इसे दो साल में पूरा कर देंगे। बंगाल में इसे कोई रोक नहीं सकता।
न्यूटाउन, कोलकाता: आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के संस्थापक हुमायूँ कबीर ने कहा, “आने वाले चुनावों के लिए, जो 23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026 को दो चरणों में होने वाला है, मैं इनसे गठबंधन किया है। मेरा भाई जो भी फ़ैसला लेगा और जो भी दिशा देगा, मैं उसी के साथ आगे बढ़ूंगा। यह गठबंधन… pic.twitter.com/Tg9QYbEba2
— IANS Hindi (@IANSKhabar) March 25, 2026
Bengal Election 2026: दो चरणों में होगा मतदान
आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल की सभी 294 सीटों पर इस बार दो चरणों में मतदान कराया जाएगा। पहला चरण 23 अप्रैल को होगा, जिसमें 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। दूसरा चरण 29 अप्रैल को आयोजित होगा, जिसमें 142 सीटों पर मतदान होगा। चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। गौरतलब है कि पिछली बार के मुकाबले इस बार चुनावी प्रक्रिया को आसान बनाने और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए चरणों की संख्या घटाकर 8 से सिर्फ दो कर दी गई है। राज्य में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं और सभी सीटों पर होने वाले इन चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीतियां तेज कर दी हैं।
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