Tourist: मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। सबसे ज्यादा दबाव एलपीजी गैस की सप्लाई पर पड़ रहा है, जिसका असर उत्तराखंड की चार धाम यात्रा पर भी पड़ सकता है। यात्रा शुरू होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं, ऐसे में सरकार से लेकर ट्रांसपोर्टर और व्यापारी तक सभी स्थिति को लेकर चिंतित हैं।
LPG सप्लाई पर बढ़ता दबाव
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण भारत में एलपीजी सप्लाई प्रभावित हो रही है। सरकार ने घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के सिलेंडरों की व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की है, लेकिन फिर भी सप्लाई पहले जैसी नहीं हो पा रही है। इसका सीधा असर होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और धर्मशालाओं पर पड़ रहा है, जहां रोजमर्रा का काम प्रभावित हो रहा है।
Tourist: कब खुलेंगे चारों धाम के कपाट
19 अप्रैल: गंगोत्री और यमुनोत्री, 22 अप्रैल: केदारनाथ, 23 अप्रैल: बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब, यात्रा शुरू होने में करीब 20–22 दिन का समय बचा है, लेकिन युद्ध कब खत्म होगा इसको लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। ऐसे में गैस संकट यात्रा पर भारी पड़ सकता है।
पेट्रोल-डीजल को लेकर भी चिंता
ट्रांसपोर्टरों को सिर्फ गैस ही नहीं, बल्कि पेट्रोल और डीजल की सप्लाई को लेकर भी चिंता है। फिलहाल कोई कमी नहीं है, लेकिन अगर युद्ध लंबा चलता है तो ईंधन की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। इससे यात्रा के दौरान वाहनों का संचालन और जरूरी सामान की आवाजाही मुश्किल हो सकती है।
Tourist: उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है यात्रा
चार धाम यात्रा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार है। इससे उत्तराखंड के अलावा दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों को रोजगार मिलता है। हर साल हजारों वाहन और लाखों लोग इस यात्रा से जुड़े होते हैं।
सड़क मार्ग से सबसे ज्यादा यात्री
चार धाम यात्रा में ज्यादातर श्रद्धालु सड़क मार्ग से ही पहुंचते हैं। ऋषिकेश से करीब 1400 बसें, हरिद्वार से लगभग 800 बसें, 1000 जीप/मैक्सी, 800 टेंपो ट्रैवलर, 1000–1500 टैक्सियां, इन वाहनों के जरिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु चारों धाम तक पहुंचते हैं।
Tourist: ट्रांसपोर्टरों की सरकार से मांग
परिवहन महासंघ के अनुसार यात्रा के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। करीब 4500 से 5000 वाहन इस यात्रा में चलेंगे। ट्रांसपोर्टरों ने सरकार से मांग की है कि यात्रा के दौरान पेट्रोल-डीजल की कोई कमी न होने दी जाए, ताकि व्यवस्था सुचारू बनी रहे।
20 लाख LPG सिलेंडरों की जरूरत
Tourist: इस बार सबसे बड़ी चुनौती एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई है। पिछले साल करीब 16 लाख सिलेंडर इस्तेमाल हुए थे, जबकि इस बार करीब 20 लाख सिलेंडरों की जरूरत बताई जा रही है। रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद के चलते गैस की मांग भी तेजी से बढ़ने वाली है। सरकार के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि समय रहते गैस और ईंधन की पर्याप्त सप्लाई कैसे सुनिश्चित की जाए, ताकि चार धाम यात्रा बिना किसी रुकावट के सफलतापूर्वक पूरी हो सके।
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