US-Iran War: ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा फैसला लेते हुए साफ कर दिया है कि इजरायल की सेना ईरान में जमीनी अभियान (ग्राउंड ऑपरेशन) के लिए नहीं जाएगी। इस फैसले को अमेरिका के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
अमेरिका पर बढ़ सकता है दबाव
इस निर्णय के बाद डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिका पर ईरान के खिलाफ संभावित जमीनी अभियान का पूरा बोझ आ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर अमेरिका ग्राउंड ऑपरेशन करता है, तो उसे यह मिशन अकेले ही संभालना पड़ सकता है।
US-Iran War: हवाई और समुद्री कार्रवाई जारी रहेगी
इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान के खिलाफ अपने हवाई और समुद्री ऑपरेशन जारी रखेगा, लेकिन जमीनी स्तर पर सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होगा। यानी इजरायल सीधे तौर पर युद्ध में मौजूद रहेगा, लेकिन सीमित दायरे में।
फैसले के पीछे ये वजह
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फैसला देश की अपनी सीमाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। खासतौर पर दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ चल रहे अभियानों पर फोकस बनाए रखना इजरायल की प्राथमिकता है।
US-Iran War: अमेरिका-इजरायल रणनीति में बदलाव?
इजरायल के इस रुख से अमेरिका और उसके सहयोगियों की रणनीति पर असर पड़ सकता है। अब तक दोनों देश कई मोर्चों पर साथ मिलकर काम करते रहे हैं, लेकिन इस फैसले के बाद सैन्य सहयोग के स्वरूप में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
क्या तकनीकी सहयोग जारी रहेगा?
हालांकि अभी यह साफ नहीं हुआ है कि इजरायल अमेरिका को खुफिया या तकनीकी सहयोग देगा या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही जमीनी सेना न भेजी जाए, लेकिन इजरायल अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका का समर्थन जारी रख सकता है।
US-Iran War: युद्ध के बीच बढ़ी अनिश्चितता
इस घटनाक्रम के बाद ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव और जटिल हो गया है। वहीं, वैश्विक स्तर पर भी इस फैसले को लेकर रणनीतिक और कूटनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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