Parliament News: राज्यसभा में सोमवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर हंगामा और तीखी बहस देखने को मिली। नेता सदन जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन पर गंभीर आरोप लगाए।
‘विपक्ष को बहस में दिलचस्पी नहीं’
नड्डा ने कहा कि विपक्ष का व्यवहार दर्शाता है कि उसे न तो बहस में कोई रुचि है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों एवं संसदीय प्रक्रियाओं के प्रति सम्मान है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद की कार्यवाही को बाधित कर रहा है और नियमों का पालन नहीं कर रहा।
Parliament News: शून्यकाल में हंगामे से बढ़ा विवाद
दरअसल, शून्यकाल के दौरान भाजपा सांसद डॉ. के. लक्ष्मण ने ओबीसी श्रेणी में मुस्लिम समुदाय को दिए जा रहे आरक्षण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ केवल सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़े वर्गों को मिलना चाहिए, न कि धर्म के आधार पर। इस मुद्दे के उठते ही विपक्षी सांसदों ने विरोध शुरू कर दिया और सदन में हंगामा बढ़ गया।
विपक्ष का वॉकआउट
नियमों के तहत विपक्षी नेताओं को तत्काल बोलने का मौका नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। इस घटनाक्रम ने सदन का माहौल और अधिक तनावपूर्ण बना दिया।
Parliament News: ‘सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार’
नड्डा ने कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष बहस से बचने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दल वर्षों से वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति करते रहे हैं, खासकर मुस्लिम समुदाय के संदर्भ में।
संविधान और अंबेडकर का हवाला
उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण का आधार सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन है, न कि धर्म। इस संदर्भ में उन्होंने बीआर अबेडकर के विचारों का उल्लेख किया। साथ ही आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण को पहले भी निरस्त किया जा चुका है।
Parliament News: विपक्ष से सकारात्मक भूमिका की अपील
नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार पारदर्शी और खुली चर्चा में विश्वास रखती है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह सकारात्मक भूमिका निभाए और संसद में सार्थक बहस का हिस्सा बने।
‘अशोभनीय व्यवहार से लोकतंत्र को नुकसान’
अपने वक्तव्य के अंत में नड्डा ने विपक्ष के रवैये को अशोभनीय बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति लोकतंत्र को कमजोर करती है और सभी दलों को मिलकर संसदीय गरिमा बनाए रखनी चाहिए।
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