Ujjain: महाकालेश्वर मंदिर में गर्मियों की शुरुआत के साथ ही बाबा महाकाल की पूजा पद्धति और दिनचर्या में विशेष बदलाव किए जा रहे हैं। बढ़ते तापमान को देखते हुए मंदिर प्रशासन और पुजारियों द्वारा भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए पारंपरिक व्यवस्थाएं शुरू की जा रही हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच यह परंपरा आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र मानी जाती है।
गर्मी से राहत के लिए शुरू होगी विशेष जलधारा
मंदिर के पुजारियों के अनुसार, बाबा महाकाल को गर्मी से राहत देने के लिए प्राचीन परंपरा के तहत विशेष शिव जलधारा अर्पित की जाएगी। इसमें विभिन्न पवित्र नदियों के जल को मिलाकर भगवान को अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव ने हलाहल विष को अपने कंठ में धारण किया था, जिससे उनका ताप अधिक रहता है, इसलिए उन्हें शीतल जल अर्पित करना आवश्यक माना जाता है।
Ujjain: दो माह तक चलेगी जलधारा की विशेष व्यवस्था
वैशाख और ज्येष्ठ माह में बढ़ती गर्मी के दौरान करीब दो महीने तक बाबा पर लगातार जलधारा प्रवाहित की जाएगी। इस दौरान मिट्टी के मटकों के माध्यम से तीर्थ कुंड का पवित्र जल भगवान पर अर्पित किया जाएगा। इस जल में कई पवित्र नदियों का संगम माना जाता है, जिससे भगवान को ठंडक और शांति मिलती है।
शीतल भोग और लेपन से मिलेगा आराम
बाबा महाकाल को ठंडक प्रदान करने के लिए ठंडी वस्तुओं का भोग लगाया जाएगा और विशेष लेपन भी किया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस सेवा से भक्तों को यज्ञों के समान फल प्राप्त होता है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि बनी रहती है।
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