Iran crisis: भारत के लिए आ रहा ईरान का कच्चे तेल से भरा टैंकर अचानक अपना रास्ता बदलकर चीन की ओर मुड़ गया। खास बात ये है कि यह करीब 7 साल बाद भारत पहुंचने वाला पहला ईरानी तेल जहाज था, जो गुजरात के वाडिनार पोर्ट की तरफ आ रहा था। टैंकर में करीब 6 लाख बैरल कच्चा तेल लदा हुआ था।
अचानक बदला रूट
शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, जहाज पिछले तीन दिनों से लगातार भारत की ओर बढ़ रहा था, लेकिन गुजरात के पास पहुंचने से ठीक पहले उसने अपना रूट बदल लिया। अब यह चीन के डोंगयिंग शहर की दिशा में बढ़ रहा है, जिससे अचानक इस डील पर सवाल खड़े हो गए हैं।
Iran crisis: पेमेंट बना बड़ी वजह
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बदलाव के पीछे पेमेंट से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। केपलर के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया के अनुसार, पहले सप्लायर्स 30 से 60 दिन का क्रेडिट देते थे, लेकिन अब वे एडवांस या तुरंत भुगतान की मांग कर रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि भुगतान को लेकर सहमति नहीं बन पाई और टैंकर को रूट बदलना पड़ा।
Iran crisis: वापसी की भी संभावना
हालांकि, अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। जहाज का AIS (ट्रैकिंग सिस्टम) डेस्टिनेशन कभी भी बदला जा सकता है। अगर पेमेंट से जुड़ा मामला सुलझ जाता है, तो यह टैंकर दोबारा भारत की ओर भी लौट सकता है। वाडिनार पोर्ट पर नायरा एनर्जी की बड़ी रिफाइनरी है, जहां इस तेल की डिलीवरी होने की उम्मीद थी।
पुराना ट्रेड और नई स्थिति
बता दें कि 2018 तक भारत ईरान से बड़ी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल खरीदता था। उस समय भारत रोजाना करीब 5.18 लाख बैरल तेल ईरान से आयात करता था, जो कुल आयात का लगभग 11.5% था। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था और अन्य देशों पर निर्भरता बढ़ा दी।
अमेरिका की सीमित छूट
Iran crisis: हाल ही में अमेरिका ने 30 दिन की सीमित छूट दी है, जिसके तहत समुद्र में ईरानी तेल खरीदने की अनुमति दी गई है। यह छूट 19 अप्रैल तक लागू है, ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है।
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