Yuvraj Singh: भारत के दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह ने अपने संन्यास को लेकर बड़ा खुलासा किया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उन्हें यह बात एमएस धोनी से पता चली थी कि चयनकर्ता अब उन्हें टीम की योजनाओं में शामिल नहीं कर रहे हैं। इसके बाद ही उन्होंने 10 जून 2019 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया।
युवराज ने कहा कि 36-37 साल की उम्र में जब वे टीम में अंदर-बाहर हो रहे थे, तब न तो नेशनल क्रिकेट एकेडमी, न कप्तान विराट कोहली और न ही कोच रवि शास्त्री ने उनसे सीधे बात की। उन्होंने कहा कि इतने साल देश के लिए खेलने के बाद कम से कम साफ बातचीत और सम्मान की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
धोनी ने फोन पर दी थी साफ तस्वीर
युवराज ने बताया कि जब उन्हें कहीं से कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने धोनी को फोन किया। उस समय धोनी कप्तान नहीं थे, लेकिन उन्होंने स्थिति को समझाते हुए साफ कहा कि चयनकर्ता अब आगे की ओर देख रहे हैं और युवराज उनकी योजनाओं का हिस्सा नहीं हैं। युवराज के मुताबिक, यही वह स्पष्टता थी जो उन्हें मैनेजमेंट से नहीं मिल पा रही थी।
Yuvraj Singh: फिटनेस के नाम पर दबाव का आरोप
युवराज ने यह भी आरोप लगाया कि मैनेजमेंट ने उन्हें फिटनेस के आधार पर संन्यास लेने के लिए दबाव बनाया। उनसे कहा गया कि वे यो-यो टेस्ट पास नहीं कर पाएंगे, इसलिए उन्हें क्रिकेट छोड़ देना चाहिए। इस पर युवराज ने जवाब दिया कि संन्यास लेना उनका फैसला होगा, जबकि टीम में चयन करना मैनेजमेंट का अधिकार है।
Yuvraj Singh: कमेंट्री से दूरी की वजह भी बताई
युवराज ने यह भी खुलासा किया कि वे कमेंट्री से दूर क्यों हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने उनके बारे में निजी टिप्पणियां की थीं, जिनकी वजह से वे उनके साथ बैठकर काम नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि खेल पर आलोचना समझ में आती है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियां कभी नहीं भूलतीं।
19 साल का शानदार करियर
युवराज सिंह ने साल 2000 में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की और 2019 में संन्यास लिया। उन्होंने भारत के लिए 300 से ज्यादा वनडे, 58 टी-20 और 40 टेस्ट मैच खेले और 11 हजार से अधिक रन बनाए। वे 2007 टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 वनडे वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के अहम सदस्य रहे।
2011 वर्ल्ड कप के हीरो
2011 वर्ल्ड कप में युवराज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब जीता। उन्होंने 362 रन बनाने के साथ 15 विकेट भी लिए थे। इससे पहले 2007 टी-20 वर्ल्ड कप में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ एक ओवर में छह छक्के लगाकर इतिहास रच दिया था और 12 गेंदों में सबसे तेज अर्धशतक का रिकॉर्ड बनाया।
कैंसर से लड़कर की वापसी
वर्ल्ड कप 2011 के बाद युवराज को कैंसर का पता चला, जिसके बाद उन्होंने इलाज कराया और 2012 में टीम इंडिया में वापसी की। हालांकि वापसी के बाद उनके प्रदर्शन में पहले जैसी निरंतरता नहीं रही।
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