Kolkata News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तैयारियों की समीक्षा के लिए कोलकाता में आयोजित एक अहम बैठक के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एक वरिष्ठ चुनाव पर्यवेक्षक के बीच तीखी बहस हो गई। यह बैठक चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ द्वारा वर्चुअल माध्यम से बुलाई गई थी, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों की चुनावी तैयारियों का जायजा लिया जा रहा था।
चुनाव आयुक्त की टिप्पणियों पर जताई
सूत्रों के अनुसार, कूच बिहार दक्षिण में तैनात सामान्य पर्यवेक्षक अनुराग यादव ने बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त की कुछ टिप्पणियों पर खुलकर आपत्ति जताई। शुरुआत में यह असहमति सामान्य चर्चा का हिस्सा लगी, लेकिन जल्द ही यह बहस तीखी नोकझोंक में बदल गई, जिससे बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया। बताया जा रहा है कि स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब मुख्य चुनाव आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए अनुराग यादव को बैठक छोड़कर वापस जाने के लिए कह दिया। इस पर यादव ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि उनके साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने प्रशासनिक सेवा में 25 वर्षों का अनुभव हासिल किया है और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए।
Kolkata News: हाई-लेवल मीटिंग में हुआ बवाल
इस घटनाक्रम के बाद कुछ समय के लिए बैठक में सन्नाटा छा गया और अन्य अधिकारी भी असहज नजर आए। हालांकि, थोड़ी देर बाद बैठक को फिर से सामान्य एजेंडे पर लाया गया और अन्य मुद्दों पर चर्चा जारी रखी गई। चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया कि अनुराग यादव को उनके आक्रामक या विद्रोही रवैये के कारण नहीं, बल्कि पेशेवर अक्षमता के आधार पर हटाया गया है। दरअसल, बैठक के दौरान जब उनसे उनके निर्वाचन क्षेत्र में कुल मतदान केंद्रों की संख्या के बारे में पूछा गया, तो वे तुरंत जवाब देने में असमर्थ दिखे। उन्होंने जवाब देने से पहले काफी समय लिया और अंततः 125 मतदान केंद्रों की संख्या बताई, जिसे आयोग के अधिकारियों ने असंतोषजनक माना।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चुनाव पर्यवेक्षक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वह आयोग के लिए ज़मीनी स्थिति की सटीक जानकारी का मुख्य स्रोत होता है। ऐसे में यदि कोई अधिकारी, क्षेत्र में कई दिन बिताने के बावजूद, मतदान केंद्रों जैसी बुनियादी जानकारी भी स्पष्ट रूप से प्रस्तुत नहीं कर पाता, तो इससे पूरी चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। बैठक के दौरान कूच बिहार जिले के संवेदनशील मतदान केंद्रों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने सुझाव दिया कि ऐसे इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निषेधाज्ञा (धारा 144) लागू करने पर विचार किया जा सकता है।
इसके अलावा, राज्य प्रशासन की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि मुख्य सचिव ने प्रत्येक जिले के लिए एक ‘नोडल अधिकारी’ नियुक्त किया है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे यह सुनिश्चित करें कि हर मतदान केंद्र पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं जैसे पेयजल, शौचालय, बिजली और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध हों।
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