Kejriwal Recusal Plea: अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से खुद को दिल्ली शराब घोटाला मामले की सुनवाई से अलग करने की मांग दोहराई। केजरीवाल ने करीब डेढ़ घंटे तक अपनी दलीलें पेश करते हुए कहा कि उन्हें पहले से ही दोषी मान लिया गया है और कोर्ट के आदेशों में एक पैटर्न नजर आता है, जिसमें ईडी और सीबीआई के तर्कों को लगातार स्वीकार किया जा रहा है।
पक्षपात का आरोप, 10 वजहें बताईं
केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा को हटाने के लिए कुल 10 कारण गिनाए। उन्होंने कहा कि कई मौकों पर बिना उनकी बात सुने ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत बताया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कोर्ट में ED और CBI की लगभग हर दलील को मान लिया जाता है, जिससे निष्पक्ष सुनवाई को लेकर उनके मन में शंका पैदा हुई है।
Kejriwal Recusal Plea: RSS से जुड़े कार्यक्रमों का भी जिक्र
केजरीवाल ने दलील दी कि जस्टिस शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में शामिल हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के जुड़ाव से पक्षपात की आशंका बनती है, खासकर जब मामला राजनीतिक प्रकृति का हो।
Kejriwal Recusal Plea: ट्रायल कोर्ट के फैसले पर विवाद
गौरतलब है कि 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में केजरीवाल समेत 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ CBI ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसकी सुनवाई फिलहाल जस्टिस शर्मा कर रही हैं।9 मार्च को हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के कुछ हिस्सों पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद यह विवाद और गहरा गया।
कोर्ट का रुख और आगे की सुनवाई
इससे पहले 6 अप्रैल की सुनवाई में कोर्ट ने CBI को जवाब दाखिल करने को कहा था और स्पष्ट किया था कि यदि कोई जज को मामले से हटाने की अर्जी देना चाहता है, तो वह दे सकता है। अब केजरीवाल की इस अर्जी पर कोर्ट का फैसला अहम माना जा रहा है।
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