Viksit Bharat: राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के 72वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आने वाले समय में ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने इसे केवल तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि एक मानवीय क्रांति बताया, जो शासन प्रणाली को अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी बना सकती है।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद को श्रद्धांजलि
अपने संबोधन की शुरुआत में उपराष्ट्रपति ने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि डॉ. प्रसाद का जीवन सादगी, ईमानदारी और सेवा भाव का प्रतीक था। उन्होंने उनके सार्वजनिक जीवन की निष्ठा को आज के प्रशासन के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
Viksit Bharat: शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका
उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन व्यवस्था को नई दिशा दे रही है। इसके माध्यम से सरकारें नागरिकों की जरूरतों को बेहतर समझ पा रही हैं और त्वरित तथा प्रभावी सेवाएं प्रदान कर रही हैं। उन्होंने बताया कि इससे शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशिता को मजबूती मिल रही है।
‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य में योगदान
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में एक मजबूत सेतु का कार्य कर रही है। इसके जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना आसान हुआ है और संसाधनों के दुरुपयोग में भी कमी आई है। डेटा आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया ने प्रशासनिक कार्यों को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया है।
Viksit Bharat: युवाओं से तकनीक अपनाने की अपील
उपराष्ट्रपति ने युवाओं और पेशेवरों से आह्वान किया कि वे नई तकनीकों को अपनाकर ‘एआई-रेडी’ कार्यबल के निर्माण में योगदान दें। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग नैतिकता, निष्पक्षता और मानवता के मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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