West Bengal: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गर्म होता जा रहा है। निर्मल दत्ता, जो तृणमूल कांग्रेस के पूर्व पार्षद हैं, को बिधाननगर में मतदाताओं को डराने और प्रभावित करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद की गई, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे थे।
भाजपा उम्मीदवार की शिकायत पर हुई कार्रवाई
मामले की शुरुआत तब हुई जब बिधाननगर से भाजपा उम्मीदवार शरदवत मुखर्जी ने भारतीय चुनाव आयोग और पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्मल दत्ता मतदाताओं को धमकाकर उनके मतदान के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और 24 घंटे के भीतर दत्ता को गिरफ्तार कर लिया।
West Bengal: विवादित बयान बना गिरफ्तारी की वजह
यह विवाद 13 अप्रैल को सॉल्ट लेक में आयोजित एक बैठक के दौरान दिए गए बयान के बाद सामने आया। बैठक में निर्मल दत्ता को यह कहते हुए सुना गया कि उन्हें पता चल जाएगा कि कौन किसे वोट देता है और उनके पास मतदाताओं की जानकारी उपलब्ध है। इस बयान को विपक्ष ने मतदाताओं को डराने का प्रयास बताया और इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करार दिया।
न्यायिक हिरासत और राजनीतिक प्रतिक्रिया
गिरफ्तारी के बाद निर्मल दत्ता को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इससे पहले भी उन पर भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले के आरोप लग चुके हैं। इस मामले पर ममता बनर्जी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि एक नेता को गिरफ्तार किया जाता है, तो उनकी पार्टी के कई अन्य नेता उनकी जगह लेने के लिए तैयार हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। इस घटना ने चुनावी माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
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