UP News: मेरठ में परशुराम जयंती के अवसर पर निकाले गए जुलूस के दौरान एक प्रशासनिक कार्रवाई ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। जुलूस में हथियारनुमा प्रतीकों के प्रदर्शन को लेकर पुलिस और स्थानीय समुदाय के बीच टकराव की स्थिति बन गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
पहले जानें क्या है मामला?
बीते दिन रविवार को मेरठ में भगवान परशुराम के जन्मोत्सव पर विभिन्न संगठनों द्वारा भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) गेट से शुरू हुई शौर्य यात्रा शहर के कई इलाकों से होकर गुजरी। इस दौरान बड़ी संख्या में युवक हाथों में फरसा, डंडे और अन्य पारंपरिक प्रतीक लेकर शामिल हुए।

इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात डिप्टी एसपी शुचिता सिंह ने जुलूस को रोककर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने मौके पर माइक लेकर घोषणा की कि जो लोग फरसा और डंडा लेकर चल रहे हैं, उनकी पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वायरल वीडियो में डिप्टी एसपी साफ तौर पर चेतावनी देती नजर आ रही हैं कि जो लोग फरसा और डंडा लहरा रहे हैं, सबकी फोटोग्राफी हो रही है, सब पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। उनके इस बयान के बाद मामला तूल पकड़ गया है। कई लोगों ने इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश बताया, तो वहीं ब्राह्मण और त्यागी समाज के कुछ वर्गों ने इसे धार्मिक आस्था पर हमला करार दिया।
UP News: अन्य जुलूसों में भी दिखा शक्ति प्रदर्शन
मेरठ के अन्य इलाकों दिल्ली रोड और परतापुर में भी शोभायात्राएं निकाली गईं, जहां युवकों ने तलवार, डंडे और फरसे के साथ शक्ति प्रदर्शन किया। एक जुलूस में बुलडोजर भी शामिल किया गया, जिससे आयोजन और अधिक चर्चा में आ गया। घटना के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूज़र्स ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं और इसे एकतरफा बताया है। त्यागी ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष मांगेराम त्यागी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जहां अपराध पर सख्ती होनी चाहिए, वहां धार्मिक प्रतीकों पर कार्रवाई की जा रही है। वहीं राष्ट्रवादी नवनिर्माण दल के अध्यक्ष श्रीकांत त्यागी ने भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने पहले उनके एक निजी कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी और अब समाज के लोगों को सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी जा रही है।

कौन हैं डिप्टी एसपी शुचिता सिंह?
आपको बता दें कि शुचिता सिंह उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की रहने वाली हैं और लंबे समय से मेरठ में तैनात हैं। वह पहले सीओ दौराला रह चुकी हैं और कई चर्चित मामलों में कार्रवाई का हिस्सा रही हैं। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें सर्वश्रेष्ठ कैडेट का पुरस्कार भी मिल चुका है।
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