US- IRAN WAR: अमेरिका ईरान शांति वार्ता के जरिए दलाली करने में लगे पाकिस्तान को बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक झटका लगा है. न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब की फंडिंग रोकने की चेतावनी के बाद पाकिस्तान ने सूडान के साथ होने वाली 1.5 बिलियन डॉलर ( करीब 14000 करोड़ रुपये) की हथियारों और लड़ाकू विमानों की मेगा डील को फिलहाल स्थगित कर दिया है.
सऊदी अरब ने क्यों रोकी मदद
इस फैसले के पीछे मुख्य वजह सऊदी अरब का रुख है। सऊदी अरब ने साफ संकेत दिया कि वह इस डील के लिए वित्तीय मदद नहीं देगा। पाकिस्तान पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहा है, ऐसे में बिना बाहरी फंडिंग के इतनी बड़ी डील करना मुश्किल था।
US- IRAN WAR: बदली रणनीति का असर
बताया जा रहा है कि पश्चिमी देशों की सलाह के बाद सऊदी अरब ने अफ्रीका के संघर्षों से दूरी बनाने की रणनीति अपनाई है। खासकर सूडान में चल रहे आंतरिक संघर्ष और “प्रॉक्सी वॉर” की स्थिति को देखते हुए रियाद अब सीधे हथियार सौदों से बचना चाहता है।
दूसरी डील भी खतरे में
सिर्फ सूडान ही नहीं, बल्कि लीबिया की नेशनल आर्मी के साथ पाकिस्तान की लगभग 4 बिलियन डॉलर की संभावित डील भी अब अनिश्चितता में पड़ गई है। इससे पाकिस्तान की रक्षा निर्यात योजनाओं को बड़ा झटका लग सकता है।
US- IRAN WAR: आर्थिक और कूटनीतिक नुकसान
यह डील पाकिस्तान के लिए सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी अहम थी। इससे उसकी डिफेंस इंडस्ट्री को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सकती थी। लेकिन सऊदी अरब के फैसले ने न सिर्फ यह मौका छीना, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में पाकिस्तान की स्थिति भी कमजोर कर दी।
सूडान संकट बना बड़ी वजह
सूडान इस समय गंभीर गृहयुद्ध और मानवीय संकट से गुजर रहा है। ऐसे में बड़े देश अब सीधे सैन्य समर्थन देने के बजाय कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका असर पाकिस्तान की इस डील पर पड़ा। कुल मिलाकर, सऊदी अरब के फैसले ने पाकिस्तान को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ वैश्विक रणनीतिक मोर्चे पर भी झटका दिया है।
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