Skanda Shashti 2026: देवों के देव महादेव और माता पार्वती के पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित स्कंद षष्ठी का पर्व इस वर्ष 22 अप्रैल (बुधवार) को मनाया जाएगा। धार्मिक दृष्टि से यह दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि होती है, जिसे भगवान स्कंद का विशेष दिन माना जाता है। इस अवसर पर भक्त व्रत रखते हैं और पूरे श्रद्धा भाव से भगवान स्कंद की पूजा करते हैं। इस पर्व को स्कंद षष्ठी के नाम से जाना जाता है।

जानें तिथि, सूर्योदय-सूर्यास्त और नक्षत्र का समय
पंचांग के अनुसार, बैशाख माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि वाले इस दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 49 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 51 मिनट पर होगा। षष्ठी तिथि रात 10 बजकर 49 मिनट तक रहेगी, इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन आर्द्रा नक्षत्र रात 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगा और उसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र प्रारंभ होगा।

शुभ मुहूर्त: कब करें पूजा और महत्वपूर्ण कार्य
इस दिन बनने वाला रवि योग सुबह 5 बजकर 49 मिनट से रात 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है। हालांकि इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं है, लेकिन विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 22 मिनट तक रहेगा, जो कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है। इसके अलावा अमृत काल दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से 2 बजकर 26 मिनट तक रहेगा।
पूजा के लिए श्रेष्ठ समय: ब्रह्म मुहूर्त और गोधूलि काल
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 21 मिनट से 5 बजकर 5 मिनट तक रहेगा, जिसे पूजा-पाठ के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। वहीं, शाम का गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।

अशुभ समय: इन घंटों में न करें शुभ कार्य
अगर अशुभ समय की बात करें, तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। यमगंड काल सुबह 7 बजकर 27 मिनट से 9 बजकर 4 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 10 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा दुर्मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।
Skanda Shashti 2026: वर्ज्य काल का ध्यान रखें
इस दिन वर्ज्य काल सुबह 7 बजकर 45 मिनट से 9 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले सही मुहूर्त का ध्यान रखें और राहुकाल जैसे अशुभ समय में कार्य करने से बचें।
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