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दिल्ली हाईकोर्ट में बड़ा मोड़! केजरीवाल केस में बड़ा ट्विस्ट! जस्टिस तेजस कारिया खुद से अचानक अलग क्यों हुए?

Arvind Kejriwal Case: दिल्ली हाईकोर्ट में आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल से जुड़े मामले में अहम घटनाक्रम सामने आया है। जस्टिस तेजस कारिया ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।

यह मामला उस जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आबकारी नीति केस की सुनवाई के दौरान अदालत की कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग कर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। याचिका में इसे अदालत की छवि को नुकसान पहुंचाने और जनता को गुमराह करने की साजिश बताया गया है।

नई बेंच को सौंपा गया मामला

जस्टिस कारिया के अलग होने के बाद, चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि याचिका को अब दूसरी बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। यह मामला गुरुवार को नई बेंच के सामने आएगा।

Arvind Kejriwal Case: रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पोस्ट पर सवाल

याचिकाकर्ता का आरोप है कि 13 अप्रैल को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में हुई कार्यवाही की रिकॉर्डिंग जानबूझकर की गई और उसे विभिन्न नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया। इससे न्यायपालिका की छवि प्रभावित करने की कोशिश हुई।

याचिका में यह भी कहा गया है कि अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और प्रसारण, निर्धारित नियमों का उल्लंघन है। नियमों के मुताबिक, बिना अनुमति किसी भी प्रकार की रिकॉर्डिंग या प्रकाशन प्रतिबंधित है।

राजनीतिक नेताओं के पोस्ट का जिक्र

याचिका में कई नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट का उल्लेख किया गया है, जिनमें दिग्विजय सिंह, सौरभ भारद्वाज, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह शामिल हैं। आरोप है कि इन पोस्ट्स के जरिए अदालत की कार्यवाही को “गुमराह करने वाले तरीके” से पेश किया गया।

Arvind Kejriwal Case: पृष्ठभूमि: आबकारी नीति मामला

यह पूरा विवाद दिल्ली की अब रद्द हो चुकी आबकारी नीति से जुड़े भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया है। इस केस में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें केजरीवाल समेत अन्य आरोपियों को राहत मिली थी।

इससे पहले जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने केजरीवाल की ‘रिक्यूजल’ याचिका खारिज करते हुए कहा था कि पक्षपात के आरोप केवल आशंका पर आधारित हैं और इनके समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम ने न्यायपालिका और राजनीति के बीच बहस को और तेज कर दिया है, और अब नई बेंच में होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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