Politics: प्रधानमंत्री Narendra Modi के 18 अप्रैल के राष्ट्र संबोधन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस सांसद T. N. Prathapan ने इस मामले को लेकर Supreme Court of India में याचिका दायर की है। आरोप है कि इस भाषण का प्रसारण सरकारी चैनलों के जरिए कराकर आचार संहिता का उल्लंघन किया गया।
क्या है पूरा मामला?
याचिका के मुताबिक, पीएम मोदी ने 18 अप्रैल की रात करीब 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित किया था। यह भाषण नारी शक्ति वंदन विधेयक से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तुरंत बाद आया। प्रथापन का कहना है कि इस संबोधन का सीधा प्रसारण Doordarshan और Sansad TV पर किया गया, जो पूरी तरह सरकारी फंड से चलते हैं।
Politics: आचार संहिता उल्लंघन का आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि चुनावी माहौल के दौरान सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल कर विपक्षी दलों पर निशाना साधना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। कांग्रेस सांसद का आरोप है कि सरकार ने अपने नियंत्रण वाले मीडिया प्लेटफॉर्म का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए इस्तेमाल किया।
Politics: विपक्षी दलों का नाम लेने पर आपत्ति
टीएन प्रथापन ने अपनी याचिका में कहा है कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में Indian National Congress, All India Trinamool Congress, Dravida Munnetra Kazhagam और Samajwadi Party जैसे दलों का नाम लेकर आलोचना की। साथ ही उन्होंने इन पार्टियों पर महिला आरक्षण बिल का विरोध करने का आरोप लगाया और मतदाताओं से उन्हें जवाबदेह ठहराने की अपील की।
चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह भी मांग की गई है कि वह Election Commission of India को निर्देश दे कि पीएम मोदी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
क्यों अहम है ये विवाद?
Politics: यह मामला सिर्फ एक भाषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि चुनावी दौर में सरकारी मीडिया का इस्तेमाल किस हद तक किया जा सकता है। अगर कोर्ट इस पर सख्त रुख अपनाता है, तो भविष्य में चुनाव प्रचार के तरीकों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
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