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कृषि क्षेत्र में यूपी की बड़ी छलांग: क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में बोले CM योगी, यूपी की कृषि विकास दर 18% तक पहुंची

CM योगी

UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज शुक्रवार को लखनऊ में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) के शुभारंभ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। यह बदलाव वैज्ञानिक तकनीकों, एग्रो-क्लाइमेटिक जोन आधारित रणनीति तथा केंद्र-राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यूपी में लैब टू लैंड की अवधारणा धरातल पर उतर चुकी है, जिससे किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। कृषि विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि, प्रति हेक्टेयर उत्पादन में रिकॉर्ड सुधार, बहुफसली खेती का विस्तार और वैल्यू एडिशन पर बढ़ता फोकस इस परिवर्तन के स्पष्ट संकेत हैं।

किसानों की भूमिका में बदलाव

मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों, अंतरराष्ट्रीय कृषि केंद्रों की स्थापना, कृषि विज्ञान केंद्रों के सशक्तीकरण और प्रगतिशील किसानों की भूमिका को इस बदलाव का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। अपने संबोधन में सीएम योगी ने कहा कि अलग-अलग देशों और क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोन होने के कारण नीतियां भी उसी अनुरूप तय की जानी चाहिए। यदि अलग-अलग जोन में इस प्रकार की गोष्ठियां आयोजित की जाएं तो उसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि गत वर्ष ‘विकसित कृषि अभियान’ और ‘खेती की बात, खेत में’ कार्यक्रम के दौरान उन्हें कई जनपदों में जाने का अवसर मिला, जहां किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि शिक्षा से जुड़े प्रशिक्षुओं में अभूतपूर्व उत्साह व जिज्ञासा देखने को मिली। पहली बार इनोवेशन को सीधे व्यावहारिक धरातल पर उतारने का अवसर मिला है। पहले लैब में होने वाले अनुसंधान को लैंड तक पहुंचने में काफी समय लगता था, लेकिन अब लैब टू लैंड की अवधारणा साकार हो चुकी है और तकनीक सीधे खेत तक पहुंच रही है।

इस अभिनव पहल के लिए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस अवधारणा को व्यवहारिक रूप से देशभर में लागू करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं; आवश्यकता केवल प्रभावी नेतृत्व की है, जिसकी शुरुआत भारत सरकार के स्तर से होती है और राज्य उसे तेजी से अपनाते हैं। पहले नीतियां केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित रह जाती थीं, लेकिन अब उनके ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। अन्नदाता किसानों को योजनाओं की सही जानकारी दी जाए, तो वे स्वयं बेहतर परिणाम देने में सक्षम हैं। सीएम योगी ने वर्ष 2017 की स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय प्रदेश में मात्र 69 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) थे, जो लगभग निष्क्रिय अवस्था में थे और उनके वैज्ञानिक भी अन्य संस्थानों में अटैच थे।

UP News: कृषि विकास दर 18 प्रतिशत तक बढ़ी 

इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा 20 नए केवीके की पहल के साथ-साथ मौजूदा केंद्रों को सशक्त बनाने की कार्ययोजना पर काम हुआ। आज स्थिति यह है कि सभी केवीके सक्रिय होकर नवाचारों को बढ़ावा दे रहे हैं और प्रदेश के सभी 9 एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से कृषि विकास को नई दिशा दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ये वैज्ञानिक स्थानीय स्तर पर डेमोंस्ट्रेशन करते हैं और फिर किसानों के खेत में जाकर उसे लागू करते हैं, लगातार दौरे करते हैं, निरंतर गोष्ठियां चलती हैं और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। साथ ही भारत सरकार के साथ उनका सतत संवाद बना रहता है। इसी का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर 8 से बढ़कर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। परिणाम बताते हैं कि हम इससे भी बेहतर उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि आजादी के समय भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान लगभग 41-42 प्रतिशत था। समय के साथ इसका योगदान घटता गया। यदि कृषि व मैन्युफैक्चरिंग के बीच बेहतर समन्वय हो, तो विकास की गति और तेज हो सकती है।

वर्तमान में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान अब भी लगभग 15–16 प्रतिशत के आसपास है, जबकि कृषि का हिस्सा घटकर लगभग 20–21 प्रतिशत तक सीमित रह गया। अब आवश्यकता है कि कृषि को वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ा जाए। इसके लिए नए प्रयासों को और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाने तथा प्रभावी ढंग से विस्तार देने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक आज के दौर में अत्यंत निर्णायक भूमिका निभा सकती है। उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में विभिन्न उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र स्थापित करवाए हैं। उदाहरण के तौर पर, वाराणसी में इंटरनेशनल राइस इंस्टीट्यूट की स्थापना हुई है, जो बेहतरीन परिणाम दे रहा है। यहां से नई-नई किस्में विकसित की गई हैं। अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के अनुसार कौन-सी किस्म उपयुक्त होगी, कौन-सी तकनीक अपनाई जानी चाहिए, क्वालिटी सीड किस प्रकार उत्पादन बढ़ा सकते हैं, ये सभी परिणाम अब स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि कुछ क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर धान का उत्पादन 100 कुंतल तक पहुंच गया है, जो पहले 50–60 कुंतल तक सीमित था।

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