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सीईओ का ममता बनर्जी पर पलटवार, कहा- मैं सिर्फ लोक सेवक हूं

Mamata
Kolkata: West Bengal Chief Electoral Officer Manoj Kumar Agarwal addresses a press conference in Kolkata on Thursday, April 30, 2026. (Photo: IANS/Video Grab)

Mamata: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तीखा टकराव देखने को मिला है। राज्य की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा मुख्य निर्वाचन अधिकारी पर लगाए गए आरोपों के बाद अब सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल ने खुलकर जवाब दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि जनता के लिए काम करते हैं। इस बयान के बाद राज्य में चुनावी निष्पक्षता को लेकर बहस और तेज हो गई है।

मैं सिर्फ लोक सेवक हूं, किसी दल का नहीं

मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने ममता बनर्जी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका दायित्व केवल जनता की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि वह संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करके इस पद पर पहुंचे हैं और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्पक्षता से कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि वह न तो किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधि हैं और न ही किसी नेता के प्रति जवाबदेह, बल्कि संविधान और कानून के तहत काम करने वाले एक लोक सेवक हैं।

Mamata: मारपीट के आरोपों पर दी सफाई

ममता बनर्जी ने मतगणना केंद्र के दौरे के दौरान उनके साथ मारपीट होने का आरोप लगाया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सीईओ ने कहा कि उनके पास इस संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत नहीं आई है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर ऐसी घटना हुई होती तो सीसीटीवी फुटेज में उसका प्रमाण जरूर होता। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना के लिए विधिवत शिकायत दर्ज कराना जरूरी होता है, जो इस मामले में नहीं किया गया।

तृणमूल नेताओं ने लगाए गंभीर आरोप

इस पूरे विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई और पारदर्शिता का अभाव रहा। उनका कहना है कि मतगणना केंद्रों पर सीसीटीवी व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी और एजेंटों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय बलों द्वारा तृणमूल कार्यकर्ताओं के साथ सख्ती बरती गई।

Mamata: राजनीतिक माहौल में बढ़ी तनातनी

इन आरोप-प्रत्यारोपों के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। एक तरफ चुनाव आयोग और प्रशासन अपनी निष्पक्षता का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में यह विवाद और गहराने की संभावना है।