Congress Muslim League: 2026 के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आमतौर पर Bharatiya Janata Party द्वारा लगाए जाने वाले ‘अल्पसंख्यक तुष्टिकरण’ के आरोप को अब कांग्रेस के ही पूर्व सहयोगी ने दोहरा दिया है। All India United Democratic Front प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि कांग्रेस अब “मुस्लिम लीग जैसी पार्टी” बनती जा रही है। इस बयान ने कांग्रेस की रणनीति और उसकी राजनीतिक दिशा पर नई बहस छेड़ दी है।
असम और बंगाल के आंकड़ों ने बढ़ाई चर्चा
Assam और West Bengal के चुनावी नतीजों ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है। असम में कांग्रेस ने 126 में से 99 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन उसे केवल 19 सीटों पर जीत मिली। इन 19 में से 18 विजेता मुस्लिम समुदाय से हैं।
वहीं पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को 292 सीटों में से सिर्फ 2 सीटें मिलीं और दोनों ही मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीतीं। पार्टी ने यहां बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जिससे यह धारणा मजबूत हुई कि कांग्रेस की रणनीति खास वोट बैंक पर केंद्रित होती जा रही है।
Congress Muslim League: केरल और तमिलनाडु में भी समान रुझान
Kerala में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन UDF की वापसी हुई है, लेकिन वहां भी अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व प्रमुख रूप से दिखाई देता है। गठबंधन की 102 सीटों में से 22 सीटें Indian Union Muslim League के खाते में गईं।तमिलनाडु में Indian National Congress ने गठबंधन में पांच सीटों पर चुनाव लड़ा और दो सीटें जीतीं, जिनमें एक मुस्लिम उम्मीदवार शामिल है। इन राज्यों में मुस्लिम उम्मीदवारों का जीत प्रतिशत काफी अधिक रहा, जिसने इस बहस को और बल दिया है।
Congress Muslim League: 2014 की चेतावनी फिर चर्चा में
यह मुद्दा नया नहीं है। 2014 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस नेता A. K. Antony की अध्यक्षता में बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अल्पसंख्यकों के साथ अत्यधिक जुड़ाव से पार्टी की धर्मनिरपेक्ष छवि प्रभावित हो सकती है। यह चेतावनी अब फिर से प्रासंगिक होती दिखाई दे रही है।
अजमल का बयान और राजनीतिक पृष्ठभूमि
असम में कांग्रेस और AIUDF के संबंध पहले भी उतार-चढ़ाव से भरे रहे हैं। 2021 में दोनों साथ आए थे, लेकिन 2026 में कांग्रेस ने अलग राह चुनी। इस चुनाव में AIUDF महज दो सीटों पर सिमट गई, जबकि कांग्रेस ने उसी वोट बैंक में सेंध लगाते हुए कई मुस्लिम उम्मीदवारों को जीत दिलाई। यही वजह मानी जा रही है कि बदरुद्दीन अजमल का बयान सामने आया है।
कांग्रेस के सामने क्या चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती उसकी पारंपरिक ‘अम्ब्रेला पार्टी’ वाली छवि को बनाए रखना है। अगर पार्टी एक खास वर्ग तक सीमित होती है, तो इससे दूसरे वर्गों में दूरी बढ़ सकती है, जिसका फायदा विरोधी दल उठा सकते हैं।
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