MP News: कहते हैं प्यार न वक्त देखता है, न हालात और न ही मजहब। कुछ ऐसी ही कहानी सामने आई है मध्य प्रदेश के सतना से, जहां केंद्रीय जेल में तैनात एक मुस्लिम महिला सहायक जेलर को उसी जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी से प्यार हो गया। यह रिश्ता धीरे-धीरे इतना मजबूत हो गया कि दोनों ने समाज, धर्म और परिवार की तमाम बंदिशों को पीछे छोड़ हमेशा के लिए एक-दूसरे का हाथ थाम लिया। अब यह अनोखी प्रेम कहानी पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। जेल की सख्त दीवारों और कानून के माहौल के बीच पनपी इस मोहब्बत ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि दिल के रिश्तों पर किसी का जोर नहीं चलता।
ड्यूटी के दौरान हुई मुलाकात
जानकारी के मुताबिक, फिरोजा खातून केंद्रीय जेल सतना में सहायक जेल अधीक्षक के पद पर तैनात थीं। जेल में उनकी जिम्मेदारी वारंट इंचार्ज की थी। वहीं धर्मेंद्र सिंह जेल के अंदर वारंट से जुड़े काम में सहयोग करता था। इसी दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। पहले यह रिश्ता सिर्फ कामकाजी बातचीत तक सीमित था, लेकिन वक्त के साथ दोनों के बीच दोस्ती गहरी होती चली गई। जेल की चारदीवारी के भीतर शुरू हुई यह दोस्ती कब प्यार में बदल गई, दोनों को खुद भी एहसास नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि धर्मेंद्र सिंह का व्यवहार और सादगी फिरोजा खातून को पसंद आने लगी थी। वहीं धर्मेंद्र भी फिरोजा की ईमानदारी और व्यवहार से प्रभावित था। धीरे-धीरे दोनों ने एक-दूसरे को अपने जीवन का हिस्सा मान लिया।
हत्या के मामले में मिली उम्रकैद की सजा
धर्मेंद्र सिंह मूल रूप से छतरपुर जिले के चंदला क्षेत्र के रहने वाले हैं। वर्ष 2007 में नगर परिषद अध्यक्ष कृष्णादत्त दीक्षित की हत्या के मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने धर्मेंद्र सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके बाद वह लंबे समय तक सतना सेंट्रल जेल में बंद रहे। करीब चार साल पहले सजा पूरी होने के बाद धर्मेंद्र जेल से रिहा हो गए। हालांकि जेल से बाहर आने के बाद भी दोनों का रिश्ता खत्म नहीं हुआ। दूरी और समाज के डर के बावजूद दोनों लगातार संपर्क में रहे और आखिरकार शादी करने का फैसला कर लिया।
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धर्म बना सबसे बड़ी चुनौती
इस प्रेम कहानी में सबसे बड़ी मुश्किल दोनों का अलग-अलग धर्म होना था। धर्मेंद्र सिंह हिंदू परिवार से आते हैं, जबकि फिरोजा खातून मुस्लिम समुदाय से संबंध रखती हैं। जैसे ही दोनों के रिश्ते की जानकारी परिवार तक पहुंची, विरोध शुरू हो गया। फिरोजा खातून के परिवार वाले इस शादी के खिलाफ थे। परिवार नहीं चाहता था कि वह दूसरे धर्म में शादी करें। लेकिन फिरोजा ने अपने फैसले पर अडिग रहते हुए प्यार को चुना। बताया जा रहा है कि परिवार के विरोध और सामाजिक दबाव के बावजूद दोनों ने पीछे हटने के बजाय साथ जीने का फैसला लिया।
हिंदू रीति-रिवाज से हुई शादी
आखिरकार 5 मई को लवकुशनगर में दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लिए। शादी समारोह बेहद सादगीपूर्ण लेकिन भावुक माहौल में संपन्न हुआ। दुल्हन बनीं फिरोजा खातून पारंपरिक हिंदू वेशभूषा में बेहद खूबसूरत नजर आईं। शादी की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं और लोग इस अनोखी प्रेम कहानी पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
बजरंग दल नेताओं ने निभाई कन्यादान की रस्म
शादी का सबसे भावुक पल उस समय आया, जब दुल्हन पक्ष से कोई भी सदस्य समारोह में शामिल नहीं हुआ। ऐसे में कन्यादान की रस्म विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष राजबहादुर मिश्रा और उनकी पत्नी ने निभाई। इस दौरान बजरंग दल से जुड़े कई कार्यकर्ता भी शादी में मौजूद रहे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरे रीति-रिवाज से विवाह संपन्न कराया गया।
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