UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सभी राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने और नए सामाजिक समीकरण बनाने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) ने बड़ा संगठनात्मक विस्तार करते हुए 13 नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की घोषणा की है। इसे आगामी यूपी चुनाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ने राष्ट्रीय, प्रदेश और क्षेत्रीय स्तर पर कई नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। SBSP का कहना है कि संगठन में नए चेहरों को शामिल कर पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, ताकि 2027 के चुनाव में मजबूती के साथ उतर सके।
सहाबुद्दीन अंसारी बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
जारी सूची के मुताबिक बिजनौर निवासी सहाबुद्दीन अंसारी को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से जुड़े नेताओं को भी पार्टी में अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। इस बीच समाजवादी पार्टी को भी बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। सपा के राष्ट्रीय सचिव जावेद आलम समेत कई नेताओं और पदाधिकारियों ने SBSP का दामन थाम लिया। पार्टी में शामिल होने वालों में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव जावेद आलम प्रमुख रहे। इसके अलावा बुनकर मजदूर विकास समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष शहाबुद्दीन अंसारी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद नाजिम अंसारी, युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ताजुद्दीन अंसारी, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष खालिद सैफी, राष्ट्रीय सचिव अयूब अंसारी, प्रदेश प्रभारी कारी लाइक अंसारी, युवा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष मुफ्ती मेहर आलम कासमी अंसारी, सलीम अंसारी, मोहम्मद अय्यूब अंसारी, मोहम्मद रिजवान, मो. नईम, कल्लन सैफी, शकील अहमद, उमर, जहीर अहमद, मोहम्मद इब्राहिम, मुन्तयाज, पदम प्रकाश, अंकित कुमार, मोहम्मद फुरकान, इन्जयामुल हक, बदर जमील, सद्दन खान, नवेद आलम, अनीस अहमद, वकील अहमद (बिजनौर), वकील अहमद (लखनऊ) कारी सलमान और पूर्व प्रभारी बलराज प्रजापति शामिल रहे।
UP Politics: अरुण राजभर का अखिलेश यादव पर हमला
SBSP नेता अरुण राजभर ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा का PDA नारा सिर्फ राजनीतिक जरूरत के हिसाब से बदलता रहता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि PDA का मतलब पार्टी ऑफ डिंपल एंड अखिलेश बनकर रह गया है। वहीं इसको लेकर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले छोटे और क्षेत्रीय दल अपनी ताकत बढ़ाने में जुटे हैं। SBSP का यह संगठन विस्तार और नए नेताओं की एंट्री आने वाले चुनावी समीकरणों पर असर डाल सकती है।
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