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अमेरिका के सबसे बड़े म्यूजियम में लहराई भारत की शान, ISRO की रॉकेट वुमन नंदिनी हरिनाथ की साड़ी बनी इतिहास

अमेरिका के सबसे बड़े म्यूजियम में लहराई भारत की शान, ISRO की रॉकेट वुमन नंदिनी हरिनाथ की साड़ी बनी इतिहास

America Museum: अमेरिका के Smithsonian National Air and Space Museum में अब भारत की वैज्ञानिक उपलब्धि गर्व के साथ प्रदर्शित की जा रही है। आधुनिक विमान और अंतरिक्ष यानों के बीच Nandini Harinath की साड़ी को विशेष स्थान दिया गया है। यह वही साड़ी है, जिसे उन्होंने उस ऐतिहासिक दिन पहना था जब Mars Orbiter Mission यानी मंगलयान पृथ्वी की कक्षा से निकलकर मंगल ग्रह की ओर रवाना हुआ था।

कपड़ा नहीं, भारत की अंतरिक्ष विजय का प्रतीक

म्यूजियम ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि यह साड़ी केवल एक परिधान नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक उड़ान का प्रतीक है। इस साड़ी से जुड़ी यादें उस पल की हैं जब पूरे देश ने पहली बार मंगल तक पहुंचने का सपना सच होते देखा।नीले और लाल रंग की इस साड़ी पर खूबसूरत कढ़ाई की गई है। इसके किनारों पर नीले पैटर्न और पीले, नारंगी, हरे व लाल रंग की बारीक डिजाइन इसे और भी खास बनाती है।

America Museum: कौन हैं नंदिनी हरिनाथ?

नंदिनी हरिनाथ Indian Space Research Organisation (ISRO) की वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं। उन्हें भारत की ‘रॉकेट वुमन’ कहा जाता है। मंगलयान मिशन में उन्होंने डिप्टी ऑपरेशंस डायरेक्टर के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई थी।मिशन की योजना, संचालन और सफलता के पीछे उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।भारत का मंगलयान मिशन दुनिया के सबसे किफायती और सफल अंतरिक्ष अभियानों में से एक माना जाता है। यह मिशन लगभग 300 दिनों की यात्रा कर मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचा था।जहां इसे केवल 6 से 10 महीने तक काम करने के लिए डिजाइन किया गया था, वहीं इसने लगभग 8 वर्षों तक मंगल ग्रह के बारे में अहम जानकारियां भेजीं।पहली कोशिश में मंगल तक पहुंचने वाला पहला देश बना।मंगल तक पहुंचने वाला पहला एशियाई देश बना।दुनिया का चौथा देश बना जिसने सफल मंगल मिशन पूरा किया।

America Museum: भारतीय महिला वैज्ञानिकों को सलाम

म्यूजियम ने अपनी पोस्ट में कहा कि नंदिनी हरिनाथ जैसी वैज्ञानिकों ने भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है। यह साड़ी भारतीय महिला वैज्ञानिकों की मेहनत, समर्पण और देशभक्ति का जीवंत प्रतीक है।यह साड़ी अंतरिक्ष में नहीं गई, लेकिन इसे पहनने वाली वैज्ञानिक ने भारत को दूसरे ग्रह तक पहुंचा दिया स्मिथसोनियन म्यूजियम की यह पंक्ति आज हर भारतीय के लिए गर्व का संदेश बन गई है। यह सम्मान सिर्फ नंदिनी हरिनाथ का नहीं, बल्कि उन सभी भारतीय वैज्ञानिकों का है जिन्होंने सीमित संसाधनों में असंभव को संभव कर दिखाया।वॉशिंगटन डीसी के इस विश्वप्रसिद्ध म्यूजियम में नंदिनी हरिनाथ की साड़ी का प्रदर्शित होना इस बात का प्रमाण है कि अब भारत की उपलब्धियां केवल देश तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि पूरी दुनिया उन्हें सम्मान दे रही है।यह प्रदर्शनी युवाओं, खासकर बेटियों को यह संदेश देती है कि सपने बड़े हों तो मंजिल मंगल ग्रह भी हो सकती है।

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