Iran crisis: नई दिल्ली दौरे पर पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा बयान दिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अराघची ने कहा कि ईरान ने कभी परमाणु हथियार बनाने की इच्छा नहीं रखी और क्षेत्रीय संकट का हल केवल बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति इस समय बेहद जटिल है, लेकिन ईरान सभी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तैयार है। साथ ही उन्होंने कहा कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए चीन जो भी सकारात्मक कदम उठाएगा, ईरान उसका स्वागत करेगा।
“सैन्य समाधान नहीं, बातचीत ही रास्ता”
अराघची ने साफ कहा कि ईरान से जुड़े किसी भी मुद्दे का सैन्य समाधान संभव नहीं है। उनका कहना था कि ईरान लगातार युद्धविराम बनाए रखने और कूटनीति को मौका देने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि बातचीत के जरिए समझौते के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी दोहराया कि उनका देश परमाणु हथियारों की दिशा में कभी आगे नहीं बढ़ा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस बात को समझना चाहिए।
Iran crisis: अमेरिका और पाकिस्तान को लेकर भी दिया बयान
अमेरिका के साथ संबंधों पर बोलते हुए अराघची ने कहा कि ईरान के पास अमेरिका पर भरोसा न करने के सभी कारण मौजूद हैं, जबकि अमेरिका के पास भी ईरान पर भरोसा करने के पर्याप्त कारण हैं। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की स्थिति अब भी बनी हुई है। वहीं पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर उन्होंने कहा कि उसकी कोशिशें अभी तक विफल नहीं हुई हैं और क्षेत्रीय स्तर पर संवाद के रास्ते अब भी खुले हुए हैं।
भारत की भूमिका को बताया अहम
Iran crisis: भारत के साथ संबंधों को लेकर अराघची ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट में भारत की किसी भी रचनात्मक भूमिका का ईरान स्वागत करेगा। उन्होंने भारत को क्षेत्र में संतुलित और प्रभावशाली देश बताते हुए कहा कि भारत शांति और संवाद की दिशा में अहम योगदान दे सकता है। ईरानी विदेश मंत्री के इस बयान को ऐसे समय में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और कई देश कूटनीतिक समाधान तलाशने में जुटे हैं।
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