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देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा बयान! धीरेंद्र शास्त्री की दो टूक, बोले- सिर्फ जनता नहीं, नेता भी करें बचत

BHAGESWAR DHAM NEWS: पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri) मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के ग्राम गढ़ा में स्थित बागेश्वर धाम के प्रमुख (पीठाधीश्वर) और एक प्रसिद्ध कथावाचक हैं। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति और ईंधन खपत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि आम जनता से पेट्रोल और डीजल का उपयोग कम करने की अपील की जाती है, तो यह जिम्मेदारी केवल नागरिकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बचत और संयम की सलाह आम लोगों को दी जाती है, लेकिन नेताओं और वीआईपी संस्कृति पर उसी तरह की सख्ती दिखाई नहीं देती।

चार्टर्ड विमानों पर रोक लगाने का सुझाव

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि यदि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करने की वास्तविक चिंता है, तो नेताओं के चार्टर्ड विमानों के उपयोग पर कुछ समय के लिए रोक लगाने जैसे कदमों पर भी विचार होना चाहिए। उनका कहना था कि चार्टर्ड विमानों में बड़ी मात्रा में ईंधन की खपत होती है और यदि जनप्रतिनिधि स्वयं बचत और त्याग का उदाहरण पेश करें तो इसका सकारात्मक संदेश समाज तक पहुंचेगा।

BHAGESWAR DHAM NEWS: “बड़ा मजा आता” अगर नेताओं पर भी लगती रोक

धीरेंद्र शास्त्री ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यदि नेताओं के चार्टर विमानों पर रोक लगती तो “बड़ा मजा आता”, क्योंकि इससे यह संदेश जाता कि राजनीतिक वर्ग भी आम जनता के साथ मिलकर आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय अभियान की सफलता तब बढ़ जाती है, जब उसमें समाज के सभी वर्ग समान रूप से भागीदारी निभाते हैं।

नेताओं की सैलरी रोकने का भी दिया सुझाव

बागेश्वर धाम के महंत ने तीन महीने के लिए नेताओं के वेतन पर रोक लगाने जैसे प्रतीकात्मक कदमों का भी सुझाव दिया। उनके अनुसार, ऐसे फैसले जनता के बीच विश्वास पैदा करते हैं और यह संदेश देते हैं कि देशहित में त्याग केवल आम नागरिकों से ही नहीं, बल्कि सत्ता और राजनीति से जुड़े लोगों से भी अपेक्षित है।

BHAGESWAR DHAM NEWS: “रुपया मजबूत करने की जिम्मेदारी सबकी”

धीरेंद्र शास्त्री ने सवाल उठाया कि क्या भारतीय रुपये को मजबूत करने की जिम्मेदारी केवल आम जनता की है? उन्होंने कहा कि आर्थिक सुधार और संसाधनों की बचत के प्रयास तभी प्रभावी होंगे, जब सरकार, नेता, उद्योग जगत और आम नागरिक सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उनके मुताबिक, राष्ट्रहित में साझा जिम्मेदारी और समान भागीदारी का भाव ही देश को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बना सकता है।

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