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पुणे जहरीली शराब कांड: मौतों का आंकड़ा 15 पहुंचा, 8 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

Pune Liquor CASE: महाराष्ट्र के पुणे में जहरीली शराब कांड ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। हडपसर, कालेपडल और पिंपरी-चिंचवड़ क्षेत्रों में जहरीली शराब पीने से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन के अनुसार, पिंपरी-चिंचवड़ क्षेत्र में 10 लोगों और हडपसर-कालेपडल इलाके में 5 लोगों की जान गई है। कई अन्य पीड़ित अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अपराध अन्वेषण विभाग (CID) को सौंप दी गई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि अवैध शराब में मेथनॉल मिलाया गया था, जो मौतों की मुख्य वजह बना।

पुलिस विभाग में बड़ा एक्शन दो थानों में 8 पर गिरी गाज

घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने जिम्मेदारी तय करते हुए कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की है। पिंपरी-चिंचवड़ के फुगेवाड़ी क्षेत्र में 10 मौतों के मामले में दापोडी पुलिस थाने के पुलिस निरीक्षक विजय वाघमारे को निलंबित कर दिया गया है। उनके साथ जांच टीम के प्रभारी समेत चार अन्य पुलिसकर्मियों को भी सस्पेंड किया गया है।

वहीं हडपसर क्षेत्र में हुई मौतों के मामले में तीन पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें शामिल हैं: सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर संजय मोगले, असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर हसीना सिकलगर, पुलिस सब-इंस्पेक्टर हसन मुलाणी और इसके अलावा अपराध शाखा के पुलिस निरीक्षक नरेंद्र ठाकरे का तबादला कर उन्हें कंट्रोल रूम भेज दिया गया है।

Pune Liquor CASE: कैसे काम करता था अवैध शराब नेटवर्क?

जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह अवैध नेटवर्क पुणे शहर, पुणे ग्रामीण और पिंपरी-चिंचवड़ तक फैला हुआ था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पुणे ग्रामीण क्षेत्र के उरली कांचन गांव निवासी राधेश्याम प्रजापती कथित रूप से जहरीली शराब तैयार करता था। इसके बाद यह शराब मुख्य आरोपी योगेश वानखेड़े तक पहुंचती थी, जो इसे विभिन्न अवैध शराब अड्डों तक सप्लाई करता था। पुलिस के अनुसार, योगेश वानखेड़े शराब तस्करी से जुड़ा पुराना आरोपी है और उसके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं।

कई गिरफ्तारियां, जांच जारी

पुलिस अब तक मुख्य आरोपी योगेश वानखेड़े समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। कर्नल सिंह विरखा और उनके बेटे गुरु मंगल सिंह पर भी जहरीली शराब की खेप बेचने का आरोप है। CID, पुलिस और राज्य उत्पादन शुल्क विभाग संयुक्त रूप से पूरे नेटवर्क की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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